शिक्षा विभाग में ‘भ्रष्टाचार का खेल’, 57 लाख के बिल के लिए मांगे 5 लाख; निगरानी ने सहायक अभियंता को रंगे हाथ दबोचा

बेतिया | 02 मार्च, 2026

खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):

  • बड़ी कार्रवाई: शिक्षा विभाग के सहायक अभियंता रौशन कुमार 5 लाख रुपये घूस लेते गिरफ्तार।
  • कमीशन का खेल: 57 लाख रुपये के रिपेयरिंग बिल पास करने के बदले मांगा था 10% कमीशन।
  • निगरानी का जाल: पटना से आई निगरानी टीम ने रंगे हाथ दबोचा।
  • हड़कंप: गिरफ्तारी के बाद विभाग के अन्य भ्रष्ट अधिकारियों में मचा हड़कंप।

बेतिया: बिहार के बेतिया (पश्चिम चंपारण) में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बार फिर ‘नीतीश सरकार’ का डंडा चला है। यहाँ शिक्षा विभाग में जड़ें जमा चुके भ्रष्टाचार के सिंडिकेट पर पटना से आई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने बड़ी ‘स्ट्राइक’ की है। टीम ने विभाग के सहायक अभियंता (AE) रौशन कुमार को 5 लाख रुपये की मोटी रकम रिश्वत के तौर पर लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है।

10% कमीशन की ‘डेडलाइन’ और 57 लाख का बिल

​पूरी घटना की जड़ में 57 लाख रुपये की एक रिपेयरिंग योजना है। जानकारी के अनुसार, रहीमपुर नौतन निवासी शम्स तबरेज (वादी) ने विभाग के जरिए मरम्मत का कार्य कराया था। कार्य पूर्ण होने के बाद जब 57 लाख रुपये के बिल के भुगतान की बारी आई, तो सहायक अभियंता रौशन कुमार ने अड़ंगा लगा दिया। आरोप है कि उन्होंने बिल पास करने के एवज में कुल राशि का 10 प्रतिशत यानी करीब 5.70 लाख रुपये कमीशन के तौर पर मांगे थे।

निगरानी का ‘मास्टर प्लान’ और रंगे हाथ गिरफ्तारी

​शम्स तबरेज ने हार मानने के बजाय पटना स्थित निगरानी विभाग में इसकी लिखित शिकायत कर दी।

  • सत्यापन: विभाग ने गुप्त रूप से शिकायत की जांच की, जो सही पाई गई।
  • जाल बिछाया: सोमवार को निगरानी के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) सुधीर कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम बेतिया पहुँची।
  • दबोचे गए: जैसे ही शम्स तबरेज ने सहायक अभियंता रौशन कुमार को रिश्वत की पहली किश्त के तौर पर 5 लाख रुपये थमाए, पहले से घात लगाकर बैठी निगरानी टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया।

विभागीय गलियारों में मचा हड़कंप

​सहायक अभियंता की गिरफ्तारी की खबर बिजली की तरह पूरे बेतिया और शिक्षा विभाग में फैल गई। दफ्तरों में सन्नाटा पसर गया और कई अन्य कर्मचारी मौका देखकर खिसक लिए। निगरानी टीम अब रौशन कुमार को पटना ले गई है, जहाँ उनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस ‘कमीशनखोरी’ के खेल में विभाग के और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।

VOB का नजरिया: क्या केवल छोटे प्यादों पर होगी कार्रवाई?

​बिहार में पुल गिरने और सड़कों के धंसने की खबरों के बीच सहायक अभियंता का 10% कमीशन मांगना यह साबित करता है कि सरकारी योजनाओं में घटिया निर्माण की असली वजह क्या है। 57 लाख के बिल के लिए 5 लाख की घूस यह बताती है कि भ्रष्टाचार किस कदर सरकारी फाइलों में दीमक की तरह लगा हुआ है। निगरानी की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इस सिंडिकेट के ‘आकाओं’ तक भी पुलिस के हाथ पहुँच पाएंगे?

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