भागलपुर | 02 मार्च, 2026: सिल्क सिटी के आदमपुर स्थित शिव शक्ति गार्डन में रविवार को हिंदू समाज द्वारा आयोजित ‘हिंदू सम्मेलन’ ने एकता और सांस्कृतिक गौरव की एक नई इबारत लिखी। संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस दो दिवसीय सत्र वाले कार्यक्रम में न केवल सनातन परंपराओं की झलक दिखी, बल्कि समाज को एकजुट रखने के लिए ‘पंच परिवर्तन’ का मंत्र भी दिया गया।
सांस्कृतिक सत्र: जीवंत हुए महापुरुष और स्वतंत्रता सेनानी
सम्मेलन का पहला सत्र पूरी तरह कला और संस्कृति के नाम रहा। कृष्णा कलायन कला केंद्र की निदेशक श्वेता सुमन के निर्देशन में कलाकारों ने समां बांध दिया।
- मंगल शुरुआत: आरुषि माही ने गणेश वंदना और यशिका साई ने श्री राम वंदना के साथ भक्तिमय आगाज किया।
- महापुरुषों की झांकी: “भारत ये रहना चाहिए” प्रस्तुति ने सबका दिल जीत लिया। इसमें नन्हे कलाकारों ने स्वामी विवेकानंद, रानी लक्ष्मीबाई और भगत सिंह के स्वरूप को मंच पर जीवंत कर दिया।
- भजन संध्या: श्वेता सुमन और सोनी पांडे के गायन ने माहौल को शिव और दुर्गा की स्तुति से गुंजायमान कर दिया।
वैचारिक सत्र: ‘पंच परिवर्तन’ और भावी चुनौतियां
दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता प्रान्त कार्यवाह बालमुकुंद ने हिंदू समाज की एकजुटता पर जोर दिया। उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ के महत्व को समझाते हुए बताया कि कैसे सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों के जरिए समाज को मजबूत किया जा सकता है।
- अध्यक्षीय संबोधन: प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने मंच की अध्यक्षता करते हुए समाज में स्वास्थ्य और संस्कार के समन्वय पर बात की।
- चुनौती और समाधान: विभाग प्रचार प्रमुख अजीत घोष ने वर्तमान समय में हिंदू समाज के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके व्यावहारिक समाधानों पर प्रकाश डाला।
- मुख्य अतिथि: शिव शक्ति मंदिर के महंत अरुण बाबा ने आशीर्वाद वचन दिए।
सामूहिक हनुमान चालीसा से गूँजा आसमान
समारोह का समापन किसी महा-अनुष्ठान जैसा रहा। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सैकड़ों परिवारों ने एक सुर में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसके बाद भारत माता की आरती के साथ इस भव्य सम्मेलन का समापन हुआ। आयोजन का सफल संचालन महानगर प्रचार प्रमुख आशीष आनंद ने किया।
VOB का नजरिया: आस्था और राष्ट्रवाद का अद्भुत तालमेल
भागलपुर के ‘गुरु गोविंद सिंह महानगर’ क्षेत्र से जुड़ने वाले सैकड़ों परिवारों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि समाज अब अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है। डॉ. अजय सिंह जैसे बुद्धिजीवियों का नेतृत्व और श्वेता सुमन जैसी कलाकारों का सांस्कृतिक योगदान यह बताता है कि यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज के सर्वांगीण विकास का एक रोडमैप है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


