सहरसा (सिमरी बख्तियारपुर) | 02 मार्च, 2026: बिहार के सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर में कानून को ठेंगे पर रखने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। शनिवार दोपहर हिन्दुपुर गांव में दो युवकों को बंधक बनाए जाने की सूचना पर उन्हें छुड़ाने पहुँची पुलिस टीम पर ही ग्रामीणों ने धावा बोल दिया। उग्र भीड़ ने पुलिस पदाधिकारियों के साथ न केवल धक्का-मुक्की की, बल्कि उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा भी।
फोटो खींचने के शक में ‘बंधक’ और फिर बवाल
घटना की शुरुआत शनिवार दोपहर करीब 12:50 बजे हुई। पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्रामीणों ने दो बाहरी युवकों को एक घर में बंधक बना रखा है।
- युवकों की पहचान: बंधक बनाए गए युवकों के नाम भैरव कुमार और राहुल कुमार (निवासी: सिरादेय पट्टी कहरा, सहरसा) हैं।
- ग्रामीणों का आरोप: लोगों का कहना था कि ये दोनों युवक बिना अनुमति घर में घुसकर फोटो खींच रहे थे, जिससे ग्रामीण भड़क गए और उन्हें कमरे में बंद कर दिया।
- पुलिस पर हमला: जब पुलिस पदाधिकारी मो. आसिफ अनवर खान मौके पर पहुँचे और युवकों को छोड़ने के लिए ग्रामीणों को समझाने लगे, तभी भीड़ उग्र हो गई। महिलाओं और पुरुषों ने मिलकर पुलिस टीम पर हमला कर दिया और उनके साथ मारपीट की।
पुलिस की कार्रवाई: पूर्व वार्ड सदस्य गया जेल
हालात बिगड़ते देख पुलिस ने अतिरिक्त बल के साथ दोनों युवकों को भीड़ के चंगुल से सुरक्षित निकाला और थाने पहुँचाया। इसके बाद पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है:
- प्राथमिकी दर्ज: पुलिस ने 5 नामजद और 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने और जानलेवा हमले की FIR दर्ज की है।
- पहली गिरफ्तारी: वीडियो फुटेज के आधार पर पहचान कर पूर्व वार्ड सदस्य निर्मल यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
- सर्च ऑपरेशन: थानाध्यक्ष अमरनाथ कुमार ने बताया कि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
VOB का नजरिया: ‘भीड़तंत्र’ बनाम ‘कानून’
सहरसा की यह घटना ‘मॉब मेंटालिटी’ का एक खतरनाक उदाहरण है। किसी पर शक होने पर पुलिस को सूचना देने के बजाय कानून हाथ में लेना और फिर वर्दी पर ही हाथ उठाना किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं है। पुलिस ऑफिसर पर हमला सीधे राज्य की इकबाल को चुनौती है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ उम्मीद करता है कि ऐसे तत्वों पर सख्त कार्रवाई होगी ताकि भविष्य में कोई वर्दी पर हाथ उठाने की हिम्मत न करे।


