कटिहार में दरिंदगी: मकई के खेत में मिला 9 साल की मासूम का शव; दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका, नाबालिग आरोपी गिरफ्तार

कटिहार/कोढ़ा | 01 मार्च, 2026: बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। कोढ़ा थाना क्षेत्र में एक 9 साल की मासूम बच्ची की बेरहमी से हत्या कर दी गई। मकई के घने खेत में मिले बच्ची के शव ने पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश भर दिया है। परिजनों का आरोप है कि हत्या से पहले मासूम के साथ दरिंदगी (दुष्कर्म) की गई है।

शनिवार से लापता, रविवार को ‘खूनी मकई’ के बीच मिला शव

​इस हृदयविदारक घटना का सिलसिला शनिवार दोपहर से शुरू हुआ:

  • लापता: शनिवार दोपहर करीब 3:00 बजे बच्ची घर से निकली और फिर वापस नहीं लौटी।
  • रातभर तलाश: परिजनों ने गांव की मस्जिदों से घोषणा कराई, रातभर टॉर्च की रोशनी में तलाश की, लेकिन मासूम का कहीं पता नहीं चला।
  • शव की बरामदगी: रविवार सुबह 9:00 बजे जब एक किसान खेत में पटवन करने गया, तो उसने मकई के पौधों के बीच बच्ची का बेजान शव देखा।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई: हिरासत में नाबालिग आरोपी

​घटना की सूचना मिलते ही SDPO-2 कोढ़ा, रंजन कुमार सिंह और पुलिस टीम मौके पर पहुँची। पुलिस ने वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू की और त्वरित कार्रवाई करते हुए:

    1. संदिग्ध की गिरफ्तारी: ग्रामीणों की मदद से एक नाबालिग युवक को हिरासत में लिया गया।
    2. हथियार बरामद: पूछताछ के दौरान आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार बरामद कर लिया गया है।
    3. न्यायिक हिरासत: आरोपी किशोर को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।

​”शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच हो रही है। दुष्कर्म की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी।”

रंजन कुमार सिंह, SDPO-2 कोढ़ा

अफवाहों का साया और चीखता हुआ परिवार

​इलाके में पिछले कुछ दिनों से ‘बच्चा चोरी’ की अफवाहों का बाजार गर्म था, जिससे ग्रामीण पहले से ही खौफ में थे। इस हत्या ने उस डर को हकीकत के खौफ में बदल दिया है। मृतका के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरा गांव दोषियों के लिए फांसी की मांग कर रहा है।

VOB का नजरिया: क्या मकई के खेत अब ‘कत्लगाह’ बन रहे हैं?

​बिहार के ग्रामीण इलाकों में मकई के ऊंचे खेत अपराधियों के लिए सेफ जोन बनते जा रहे हैं। कटिहार की यह घटना समाज के गिरते नैतिक स्तर की ओर इशारा करती है, जहाँ एक नाबालिग ही दूसरी मासूम का कातिल बन बैठा है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ मांग करता है कि ऐसे मामलों में ‘स्पीडी ट्रायल’ हो ताकि न्याय में देरी न हो।

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