सहरसा की 5 ‘लापता’ बेटियों का लखनऊ कनेक्शन: अश्बाग स्टेशन से सभी सुरक्षित बरामद; पुलिस की मुस्तैदी ने टाला बड़ा अनहोनी का साया

सहरसा/लखनऊ | 01 मार्च, 2026: बिहार के सहरसा जिले के नवहट्टा प्रखंड स्थित पिपरही गांव से शुक्रवार को लापता हुईं पांचों नाबालिग बच्चियों के मामले में आखिरकार एक सुखद अंत सामने आया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ की टीम को मिली जानकारी के अनुसार, इन सभी बच्चियों को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अश्बाग रेलवे स्टेशन से सकुशल बरामद कर लिया गया है। इस खबर के मिलते ही पिछले 48 घंटों से खौफ और मातम में डूबे पिपरही गांव में अब होली की असली खुशियां लौट आई हैं।

700 किलोमीटर दूर लखनऊ में कैसे मिलीं बेटियां?

​सहरसा पुलिस के लिए यह मामला किसी चुनौती से कम नहीं था। मवेशियों के लिए घास काटने निकलीं पांच किशोरियां एक साथ गायब हुई थीं, जिससे मानव तस्करी की आशंका गहरा गई थी। पुलिस ने इस ऑपरेशन को बेहद पेशेवर तरीके से अंजाम दिया:

  • तकनीकी सुराग: पुलिस ने मोबाइल लोकेशन और तकनीकी सर्विलांस का सहारा लिया, जिससे पता चला कि बच्चियां उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाली ट्रेन में हो सकती हैं।
  • लखनऊ पुलिस से संपर्क: जैसे ही इनपुट्स पुख्ता हुए, सहरसा पुलिस ने तुरंत लखनऊ पुलिस और अश्बाग रेलवे स्टेशन की सुरक्षा टीम से संपर्क साधा।
  • सकुशल बरामदगी: पुलिस की तत्परता रंग लाई और अश्बाग स्टेशन पर घेराबंदी कर पांचों बच्चियों को सुरक्षित पहचान लिया गया।

अब घर वापसी की तैयारी: जांच अभी बाकी है

​फिलहाल सभी बच्चियों को लखनऊ में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और मेडिकल चेकअप के बाद सुरक्षित संरक्षण (Safe Custody) में रखा गया है। सहरसा से पुलिस की एक विशेष टीम उन्हें वापस लाने के लिए रवाना हो चुकी है।

​हालांकि, बच्चियां मिल गई हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी बरकरार है कि:

  1. ​घास काटने निकलीं बच्चियां अचानक सहरसा से 700 किमी दूर लखनऊ कैसे पहुँच गईं?
  2. ​क्या यह केवल ‘घर छोड़कर भागने’ का मामला है या इसके पीछे कोई पेशेवर गिरोह है जिसने उन्हें झांसा दिया?
  3. ​क्या किसी ने उन्हें वहां तक पहुँचाने में मदद की?

परिजनों ने ली चैन की सांस

​गांव में जैसे ही बच्चियों के सुरक्षित होने की खबर पहुँची, परिजनों की आंखों से आंसू छलक पड़े। सहरसा पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि बच्चियों के सहरसा पहुँचने के बाद उनके बयान दर्ज किए जाएंगे, जिससे पूरे रहस्य से पर्दा उठ सकेगा।

VOB का नजरिया: मुस्तैदी ने बचा लीं पांच जिंदगियां

​अक्सर ऐसे मामलों में समय की बहुत अहमियत होती है। अगर सहरसा पुलिस ने तकनीकी जांच में देरी की होती, तो शायद ये बच्चियां किसी बड़े खतरे में फंस सकती थीं। यह घटना न केवल पुलिस की सफलता है, बल्कि हमारे समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि किशोरियों की सुरक्षा और उनकी गतिविधियों पर नजर रखना कितना जरूरी है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ सहरसा पुलिस के टीमवर्क को सलाम करता है और बेटियों की सुरक्षित वापसी की कामना करता है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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