
जमुई | 01 मार्च, 2026: बिहार के जमुई जिले के सोनो प्रखंड से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा विभाग में खलबली मचा दी है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सरधोडीह के एक वायरल वीडियो ने सरकारी संपत्ति की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में स्कूल के सेवानिवृत्त (Retired) प्रभारी हेडमास्टर एक सफेद मारुति वेगनर कार में धड़ाधड़ कंप्यूटर सिस्टम लोड करते नजर आ रहे हैं, जिसे ग्रामीण ‘दिनदहाड़े चोरी’ करार दे रहे हैं।
वायरल वीडियो: सरकारी ‘वेगनर’ और गायब होते कंप्यूटर
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहे इस वीडियो में हेडमास्टर नीरज कुमार को स्कूल की आईसीटी (ICT) लैब के कंप्यूटर कार में भरते देखा जा रहा है। जैसे ही यह वीडियो ग्रामीणों तक पहुँचा, स्कूल परिसर जंग का मैदान बन गया। लोगों का आरोप है कि रिटायरमेंट के बाद हेडमास्टर साहब स्कूल की संपत्ति पर अपना हक जता रहे हैं और गुपचुप तरीके से इसे ठिकाने लगा रहे हैं।
हेडमास्टर की दलील: “चोरी नहीं, कांट्रेक्टर को सुपुर्दगी थी”
विवाद बढ़ता देख रिटायर हेडमास्टर नीरज कुमार ने अपनी सफाई पेश की है। उनका कहना है कि यह कोई चोरी नहीं बल्कि विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा है। उनके अनुसार:
- जनवरी 2025 का पत्र: विभाग की ओर से आईसीटी लैब को निरस्त करने का आदेश पिछले साल ही आ गया था।
- डीईओ (DEO) का निर्देश: 10 फरवरी को जिला शिक्षा पदाधिकारी ने सभी स्कूलों से पूछा था कि क्या उनके यहाँ से कंप्यूटर ले जाए गए हैं या नहीं।
- कांट्रेक्टर का कनेक्शन: हेडमास्टर का दावा है कि जिस कार में कंप्यूटर लोड किए जा रहे थे, वह संबंधित कांट्रेक्टर की थी। उन्होंने रिटायर होने के बाद केवल अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सामान सही हाथों में सौंपा है।
ग्रामीणों का शक: “2 साल पुरानी लैब अचानक बंद क्यों?”
ग्रामीणों और अभिभावकों की कहानी कुछ और ही है। उनका कहना है कि करीब दो साल पहले ही इस स्कूल में 20 कंप्यूटरों वाली हाई-टेक आईसीटी लैब बनाई गई थी। कुछ समय बाद उसे बंद कर दिया गया और अब बिना किसी पूर्व सूचना के चोरी-छिपे कंप्यूटर हटाए जा रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि अगर यह विभागीय आदेश था, तो इसके दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए?
स्कूल में तालाबंदी: अब विभाग के ‘साहब’ का इंतज़ार
आक्रोशित ग्रामीणों और छात्रों ने स्कूल के गेट पर प्रदर्शन किया और अंततः स्कूल में ताला जड़ दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्कूल प्रशासन की ओर से भी एक अतिरिक्त ताला लगाया गया है।
अब स्कूल की चाबी तभी घूमेगी जब शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी मौके पर पहुँचकर जांच करेंगे। फिलहाल, सरधोडीह स्कूल में पढ़ाई ठप है और पूरा गांव ‘डिजिटल घोटाले’ की गूँज से सराबोर है।
VOB का नजरिया: पारदर्शिता की कमी या व्यवस्था की खामी?
अक्सर बिहार के सरकारी स्कूलों से सामान चोरी होने की खबरें आती हैं, लेकिन यहाँ मामला और भी पेचीदा है। अगर हेडमास्टर सही हैं और विभाग का आदेश था, तो शाम के समय कार में कंप्यूटर लादने की प्रक्रिया ने संदेह को जन्म दिया। शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह तुरंत स्पष्ट करे कि क्या राज्य के अन्य स्कूलों से भी आईसीटी लैब हटाई जा रही हैं? ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी होने तक नजर बनाए रखेगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


