शिवहर | 28 फरवरी, 2026: ‘बिहार नवनिर्माण अभियान’ के तहत आज शिवहर पहुंचे जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बिहार की सत्ताधारी और मुख्य विपक्षी पार्टी, दोनों पर तीखे प्रहार किए। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने राज्य के ज्वलंत मुद्दों से लेकर विपक्षी राजनीति की प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल उठाए।
तेजस्वी की राजनीति पर तंज: “जनता के सरोकार से कटे नेता”
प्रशांत किशोर ने विपक्षी नेतृत्व की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को नेताओं की व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से कोई लेना-देना नहीं है:
- अप्रासंगिकता: उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव राज्यसभा जाएं या विधानसभा, इससे बिहार के आम लोगों को कोई मतलब नहीं है।
- विकास बनाम कुर्सी: पीके के अनुसार, बिहार की राजनीति केवल कुर्सियों के अदल-बदल तक सीमित रह गई है, जबकि जनता के बुनियादी सवाल हाशिए पर हैं।
राजस्थान त्रासदी और ‘डबल इंजन’ की चुप्पी पर सवाल
हाल ही में राजस्थान की एक पटाखा फैक्ट्री में बिहार के मजदूरों की जलकर हुई मौत पर प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री, दोनों को कठघरे में खड़ा किया:
- श्रमिकों की अनदेखी: उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में बिहार के मजदूरों की जान चली गई, लेकिन इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दोनों ने चुप्पी साध रखी है।
- पलायन का दर्द: पीके ने कहा कि बिहार के युवा दूसरे राज्यों में मजदूरी करने और मरने के लिए मजबूर हैं, लेकिन सत्ता में बैठे लोगों को उनकी कोई चिंता नहीं है।
शराबबंदी पर प्रधानमंत्री को चुनौती
बिहार में लागू शराबबंदी को लेकर प्रशांत किशोर ने एक बार फिर तंज कसते हुए प्रधानमंत्री मोदी से सीधा सवाल किया:
- देशव्यापी शराबबंदी की मांग: “अगर शराबबंदी से महिलाओं को इतना ही फायदा हो रहा है, तो मोदी जी पूरे देश में शराबबंदी लागू क्यों नहीं कर देते? वे देश की सभी महिलाओं को यह फायदा क्यों नहीं पहुँचा रहे हैं?”
- विफलता का आरोप: उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार में शराबबंदी केवल कागजों पर है और इसका आर्थिक नुकसान राज्य को उठाना पड़ रहा है, जबकि शराब की होम डिलीवरी जारी है।
VOB का नजरिया: क्या पलायन और नशा ही बिहार की नियति है?
प्रशांत किशोर के बयान उस कड़वी सच्चाई की ओर इशारा करते हैं जहाँ बिहार का श्रमिक दूसरे राज्यों में असुरक्षित स्थितियों में काम करने को मजबूर है। राजस्थान की घटना ने एक बार फिर ‘सुरक्षित रोजगार’ के सरकारी दावों की पोल खोल दी है। वहीं, शराबबंदी पर उनकी टिप्पणी सीधे तौर पर इसे राजनीतिक हथकंडा करार देती है। शिवहर की इस प्रेस ब्रीफिंग ने साफ कर दिया है कि आगामी दिनों में जन सुराज बिहार के बुनियादी मुद्दों पर सरकार को चैन से बैठने नहीं देगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


