बिहार कृषि ऐप के नए वर्जन से रजिस्ट्रेशन हुआ आसान; खाद की लाइव जानकारी और एआई (AI) से होगा फसलों का इलाज

पटना | 28 फरवरी, 2026: बिहार के कृषि क्षेत्र में एक बड़ी डिजिटल क्रांति दस्तक दे रही है। राज्य सरकार का कृषि विभाग अब किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाने के लिए ‘बिहार कृषि ऐप’ को एक ‘सुपर ऐप’ के रूप में विकसित कर रहा है। शनिवार को विभाग ने ऐप का नया वर्जन (v.1.10.2) जारी किया है, जिससे न केवल पंजीकरण आसान होगा, बल्कि खेती-किसानी से जुड़ी हर छोटी-बड़ी समस्या का समाधान एक क्लिक पर मिलेगा।

डिजिटल किसान पहचान पत्र और आसान रजिस्ट्रेशन

​अब बिहार के किसानों को किसान पंजीकरण या ‘डिजिटल किसान पहचान पत्र’ बनवाने के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। नए अपडेट के बाद:

  • ​किसान सीधे अपने मोबाइल से फार्मर रजिस्ट्रेशन (Farmer Registration) की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
  • ​ऐप में नया कैरोसेल कार्ड (Carousel Card) जोड़ा गया है, जहाँ ‘फार्मर रजिस्ट्री लिंक’ आसानी से उपलब्ध है।
  • ​डीबीटी (DBT) पोर्टल उपयोगकर्ताओं के लिए अब “क्या आप जीविका सदस्य हैं?” का विकल्प भी दिया गया है, ताकि लक्षित समूहों को सही लाभ मिल सके।

खाद की किल्लत होगी खत्म: लाइव स्टेटस की सुविधा

​अक्सर खाद के लिए किसानों को लंबी लाइनों या कालाबाजारी का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए ऐप में विशेष फीचर जोड़े गए हैं:

  • लाइव स्टेटस: किसान अपने क्षेत्र में खाद की उपलब्धता की ऑनलाइन जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  • नजदीकी दुकान: ऐप न केवल पास की खाद दुकानों की जानकारी देगा, बल्कि सीधे दुकानदार को कॉल करने की सुविधा भी प्रदान करेगा।
  • ​इससे बिचौलियों का प्रभाव कम होगा और किसानों को सही समय पर खाद मिल सकेगी।

एआई (AI) बनेगा किसानों का डॉक्टर

​फसलों में लगने वाले रोगों की पहचान के लिए अब वैज्ञानिकों का इंतजार नहीं करना होगा। ऐप में मौजूद उन्नत एआई चैटबॉट (प्रश्न पूछें) और ‘भारत विस्तार’ चैटबॉट को और भी सुगम बनाया गया है:

  • रोग पहचान: एआई की मदद से किसान फसल की फोटो या लक्षण बताकर रोग की पहचान कर सकते हैं।
  • त्वरित निदान: ऐप तुरंत रोग का सही उपचार और उपयोगी कृषि सलाह प्रदान करेगा।
  • मौसम का हाल: सटीक मौसम पूर्वानुमान के जरिए किसान बुवाई या कटाई का सही समय तय कर सकेंगे।

डिजिटल कनेक्टिविटी और सरकारी योजनाएं

​सरकार किसानों को सूचना तंत्र से जोड़ने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रही है:

  • योजनाओं का लाभ: विभिन्न कृषि योजनाओं के लिए आवेदन करना, उनकी स्थिति (Status) जानना और अनुदान (Subsidy) की स्वीकृति देखना अब पारदर्शी हो गया है।
  • सूचना केंद्र: कृषि रेडियो और किसान कॉल सेंटर के जरिए तकनीकी सलाह और सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
  • पंजीकरण की श्रेणी: विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐप में पंजीकरण के लिए डीबीटी (DBT) और नॉन-डीबीटी दोनों ही श्रेणियों के किसान मान्य होंगे।

VOB का नजरिया: तकनीक से तय होगा ‘समृद्ध बिहार’ का रास्ता

​बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में जहाँ छोटे किसानों की संख्या अधिक है, वहां डिजिटल टूल्स का उपयोग किसी वरदान से कम नहीं है। ‘बिहार कृषि ऐप’ का नया वर्जन न केवल भ्रष्टाचार को कम करेगा बल्कि किसानों के कीमती समय और संसाधनों की भी बचत करेगा। विशेष रूप से एआई चैटबॉट और खाद की लाइव ट्रैकिंग जैसे फीचर्स खेती को लाभदायक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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