बिहार के गांवों में बिछेगा सड़कों का चौड़ा जाल: ग्रामीण कार्य विभाग ने तय की ‘डेडलाइन’; 7 निश्चय पार्ट-3 के तहत चौड़ी होंगी सड़कें

पटना | 28 फरवरी, 2026: बिहार के ग्रामीण अंचलों की सूरत बदलने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग अब ‘फुल गियर’ में है। शनिवार को पटना के अधिवेशन भवन में विभाग के सचिव देवेश सेहरा की अध्यक्षता में आयोजित मैराथन समीक्षा बैठक में राज्य की ग्रामीण सड़कों और पुलों के निर्माण को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए। विभाग ने साफ कर दिया है कि अब केवल सड़कें बनाना ही काफी नहीं है, उन्हें समय पर पूरा करना और उनकी गुणवत्ता बनाए रखना प्राथमिकता होगी।

आंकड़ों में प्रगति: क्या है अब तक का रिपोर्ट कार्ड?

​बिहार में ग्रामीण संपर्कता (Connectivity) का जाल तेजी से फैला है। विभाग द्वारा साझा किए गए अद्यतन आँकड़ों के अनुसार, राज्य में लक्षित 1 लाख 29 हजार 990 बसावटों के मुकाबले 1 लाख 20 हजार 876 बसावटों को पक्की सड़क से जोड़ा जा चुका है। सड़क निर्माण के मोर्चे पर भी 1 लाख 19 हजार 915 किलोमीटर सड़क और 2750 पुलों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है।

7 निश्चय पार्ट-3: अब चौड़ी और सुरक्षित होंगी ग्रामीण सड़कें

​बैठक का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु सात निश्चय पार्ट-3 रहा, जिसके तहत गांवों की सड़कों का कायाकल्प होना है:

  • इंटरमीडिएट लेन: ग्रामीण सड़कों को चरणबद्ध तरीके से चौड़ा कर 5.5 मीटर का बनाया जा रहा है।
  • सड़क सुरक्षा: अब ग्रामीण सड़कों पर भी शहरों की तरह जेब्रा क्रॉसिंग और रिम्बल स्ट्रिप (Rumble Strips) लगाई जा रही हैं, ताकि हादसों पर लगाम लग सके।
  • भूमि उपलब्धता: चौड़ीकरण के लिए सरकारी भूमि की उपलब्धता की भी गहन समीक्षा की गई ताकि काम के दौरान कोई कानूनी बाधा न आए।

रखरखाव की ‘पक्की’ पॉलिसी: 10 साल तक मरम्मत का जिम्मा

​जर्जर सड़कों की शिकायत दूर करने के लिए विभाग ने ‘ग्रामीण सड़क रखरखाव नीति’ को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत नई बनने वाली सड़कों के लिए अब 5 से 10 साल तक का अनिवार्य रखरखाव (Mandatory Maintenance) प्रावधान किया गया है। इससे ठेकेदारों की जवाबदेही बढ़ेगी और सड़कें लंबे समय तक टिकाऊ रहेंगी।

ई-प्रोक 2: भ्रष्टाचार पर तकनीक का प्रहार

​निविदा (Tender) प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता लाने के लिए विभाग ने डिजिटल राह पकड़ी है। बैठक में सभी इंजीनियरों को ई-टेंडरिंग पोर्टल ‘ई–प्रोक 2’ का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इसका उद्देश्य मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और आधुनिक बनाना है।

बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी

​इस हाई-लेवल मीटिंग में मुख्यालय से लेकर क्षेत्रीय स्तर के दिग्गज शामिल रहे, जिनमें मुख्य रूप से अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त निर्मल कुमार, विशेष सचिव मनोज कुमार, अपर सचिव संजय कुमार व अभय झा और अभियंता प्रमुख जय किशोर ठाकुर समेत सभी मुख्य और कार्यपालक अभियंता मौजूद थे।

VOB का नजरिया: डामर की सड़क के साथ विकास की रफ्तार

​बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए ग्रामीण सड़कें केवल रास्ता नहीं, बल्कि ‘इकोनॉमिक कॉरिडोर’ हैं। 5.5 मीटर की सड़क का मतलब है कि अब किसान अपनी उपज बड़े ट्रकों के जरिए सीधे मंडी तक पहुँचा सकेंगे। विभाग का ‘ई-प्रोक 2’ और 10 साल की मेंटेनेंस पॉलिसी जैसे कदम यह दर्शाती है कि सरकार अब केवल निर्माण नहीं, बल्कि ‘क्वालिटी और अकाउंटेबिलिटी’ पर फोकस कर रही है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

  • Related Posts

    सावधान! आपकी थाली में ‘ब्रांडेड’ जहर: छपरा में नकली फॉर्च्यून तेल और टाटा नमक के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़; दिल्ली की टीम ने पुलिस के साथ मारा छापा

    Share Add as a preferred…

    Continue reading