बांका | 28 फरवरी, 2026: बिहार के बांका जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। जिलेबिया मोड़ थाना क्षेत्र में एक दो साल की मासूम बच्ची के साथ न केवल दरिंदगी की गई, बल्कि साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से उसकी नृशंस हत्या कर दी गई। इस जघन्य वारदात के बाद पूरे जिले में आक्रोश की लहर है और पुलिस प्रशासन पर दोषियों को तुरंत फांसी दिलाने का दबाव बढ़ गया है।
तारीखवार वारदात: खेलने गई थी, कफन में लौटी
मासूम अपनी नानी के घर आई हुई थी, जहाँ खुशियों के बीच मातम पसर गया:
- शुक्रवार सुबह 10:00 बजे: बच्ची घर के बाहर खेलते समय अचानक लापता हो गई।
- दोपहर से शाम तक: परिजनों और ग्रामीणों ने चप्पा-चप्पा छान मारा, लेकिन मासूम का कहीं पता नहीं चला।
- देर रात: गांव के ही एक स्कूल के पास बच्ची का क्षत-विक्षत शव मिलने से सनसनी फैल गई।
पुलिस की कार्रवाई और SP का बयान
सूचना मिलते ही एसडीपीओ और थानाध्यक्ष राजू कुमार ठाकुर दलबल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए बांका सदर अस्पताल भेज दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी उपेंद्रनाथ वर्मा ने स्वयं कमान संभाली है:
“प्राथमिक जांच और साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या की गई है। हमने तकनीकी साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम की मदद ली है। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और हम सुनिश्चित करेंगे कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।”
— उपेंद्रनाथ वर्मा, एसपी, बांका
इलाके की स्थिति: न्याय की गुहार और आक्रोश
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वर्तमान स्थिति |
विवरण |
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परिजनों का हाल |
नानी और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है, गांव में मातम है। |
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सुरक्षा व्यवस्था |
तनाव को देखते हुए गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। |
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जांच की दिशा |
हिरासत में लिए गए संदिग्धों से कड़ाई से पूछताछ जारी है; चार्जशीट जल्द दाखिल करने का दावा। |
VOB का नजरिया: क्या सुरक्षित हैं हमारी बेटियां?
2 साल की बच्ची, जिसे शायद ‘बदसलूकी’ शब्द का अर्थ भी नहीं पता होगा, उसके साथ ऐसी दरिंदगी समाज के माथे पर कलंक है। बिहार में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने के लिए केवल ‘कानून’ नहीं, बल्कि ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ के जरिए तुरंत इंसाफ की जरूरत है। बांका पुलिस के लिए यह साख का सवाल है कि वे कितनी जल्दी इन नरपिशाचों को सलाखों के पीछे पहुँचाते हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


