पीरपैंती रेफरल अस्पताल में बवाल: घायल को रेफर किया पर नहीं मिली एंबुलेंस; परिजनों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की खोली पोल

पीरपैंती (भागलपुर) | 28 फरवरी, 2026: भागलपुर जिले के पीरपैंती रेफरल अस्पताल में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की कथित बदहाली और संवेदनहीनता का एक और नमूना देखने को मिला। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल एक युवक को डॉक्टरों ने मायागंज रेफर तो कर दिया, लेकिन घंटों तक एंबुलेंस नसीब नहीं हुई। इस लापरवाही से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और सरकारी दावों की पोल खोल दी।

हादसे से लेकर हंगामे तक: क्या है पूरा मामला?

  • सड़क दुर्घटना: जानकारी के अनुसार, विनय कुमार यादव नामक युवक को एक तेज रफ्तार पिकअप वैन ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वह लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़े।
  • नाजुक हालत: स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत पीरपैंती रेफरल अस्पताल पहुँचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (JLNMCH), मायागंज रेफर कर दिया।
  • एंबुलेंस का संकट: परिजनों का आरोप है कि मरीज की जान खतरे में होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने एंबुलेंस उपलब्ध कराने में कोई तत्परता नहीं दिखाई, जिससे काफी देर तक अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही।

परिजनों का फूटा आक्रोश: सवालों के घेरे में सिस्टम

​एंबुलेंस न मिलने से नाराज परिजनों और स्थानीय लोगों का सब्र टूट गया और उन्होंने अस्पताल परिसर में ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया:

    1. लापरवाही का आरोप: परिजनों ने सीधा सवाल उठाया कि जब मरीज की स्थिति ‘क्रिटिकल’ है, तो सरकारी एंबुलेंस सेवा (102) का लाभ उसे समय पर क्यों नहीं मिला?
    2. अफरा-तफरी: घंटों तक चली बहस और हंगामे के बाद, किसी तरह वैकल्पिक व्यवस्था कर घायल विनय यादव को मायागंज अस्पताल भेजा गया। तब तक मरीज की स्थिति और भी बिगड़ चुकी थी।

VOB का नजरिया: कागजों पर ‘रेफर’ और सड़क पर ‘बेबस’

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में ‘रेफरल’ शब्द अब मरीजों के लिए किसी सजा से कम नहीं रह गया है। पीरपैंती की यह घटना साबित करती है कि सिर्फ अस्पताल की बड़ी इमारतें खड़ी करने से स्वास्थ्य सेवा बेहतर नहीं होती। जब एक गंभीर मरीज को एंबुलेंस के लिए तड़पना पड़े और परिजनों को न्याय के लिए शोर मचाना पड़े, तो समझना चाहिए कि सिस्टम खुद ‘वेंटिलेटर’ पर है। क्या प्रशासन उन अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा जिन्होंने समय पर वाहन उपलब्ध नहीं कराया?

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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