नई दिल्ली | 28 फरवरी, 2026: भारत मंडपम् में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के तीसरे दिन भारत ने वैश्विक पटल पर अपनी नैतिक शक्ति का प्रदर्शन किया है। भारत ने मात्र 24 घंटों के भीतर ‘एआई रिस्पॉन्सिबिलिटी कैम्पेन’ के लिए सर्वाधिक प्रतिज्ञाएँ प्राप्त करने का गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness World Record) अपने नाम कर लिया है। यह उपलब्धि केवल एक संख्या नहीं, बल्कि एक विकसित होते राष्ट्र का संकल्प है।
रिकॉर्ड के मुख्य आंकड़े: उम्मीद से कहीं आगे
16 से 17 फरवरी के बीच चले इस अभियान ने प्रारंभिक लक्ष्यों को ध्वस्त कर दिया:
- कुल वैध प्रतिज्ञाएँ: 2,50,946 (दो लाख पचास हजार नौ सौ छियालीस)।
- प्रारंभिक लक्ष्य: केवल 5,000 प्रतिज्ञाएँ।
- समय सीमा: मात्र 24 घंटे।
- सहयोग: इंडियाएआई (IndiaAI) मिशन और इंटेल इंडिया (Intel India)।
युवा शक्ति और ‘YUVAi’ ग्लोबल चैलेंज
भारत की 65% आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, और यही युवा शक्ति इस शिखर सम्मेलन के केंद्र में है।
- YUVAi ग्लोबल यूथ चैलेंज: 38 देशों से 2,500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए।
- थीम: ‘पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस’ (People, Planet, Progress)।
- समाधान: 13 से 21 वर्ष के युवाओं ने स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु और स्मार्ट गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में वर्किंग मॉडल पेश किए हैं।
- एआई साक्षरता: ‘युवाएआई फॉर ऑल’ कार्यक्रम के तहत 11 भारतीय भाषाओं में निःशुल्क पाठ्यक्रम उपलब्ध है, जिसका लक्ष्य 1 करोड़ नागरिकों को एआई-साक्षर बनाना है।
अवसंरचना और भविष्य की तैयारी
सरकार एआई को केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि एक बुनियादी कौशल के रूप में देख रही है। इसके लिए बड़े निवेश और नीतिगत बदलाव किए गए हैं:
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क्षेत्र |
प्रमुख पहल और लक्ष्य |
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कंप्यूटिंग पावर |
वर्तमान 38,000 GPUs में 20,000 नए GPU जोड़े जा रहे हैं। |
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रोजगार सृजन |
ऑरेंज इकोनॉमी (एनीमेशन, गेमिंग) में 20 लाख रोजगार का लक्ष्य। |
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शिक्षा |
15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में ‘कंटेंट क्रिएटर लैब’ की स्थापना। |
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अनुसंधान |
500 पीएचडी और 13,000 से अधिक स्नातक/स्नातकोत्तर छात्रों को फैलोशिप। |
अश्विनी वैष्णव का विज़न: “शॉर्टकट नहीं, सामाजिक हित”
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शिखर सम्मेलन में युवाओं से अपील की कि वे एआई को किसी शॉर्टकट की तरह नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव के साधन के रूप में अपनाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का दृष्टिकोण ‘विस्तार के साथ उत्तरदायित्व’ का है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में 31 डेटा और एआई प्रयोगशालाएँ पहले ही शुरू हो चुकी हैं, जो यह सुनिश्चित करती हैं कि आधुनिक तकनीक केवल महानगरों तक सीमित न रहे।
VOB का नजरिया: तकनीक में ‘संस्कार’ का समावेश
अक्सर तकनीक के विकास में ‘नैतिकता’ पीछे छूट जाती है, लेकिन भारत ने गिनीज़ रिकॉर्ड के जरिए यह संदेश दिया है कि हम एआई की दौड़ में सबसे आगे तो रहना चाहते हैं, लेकिन अपनी शर्तों और नैतिक मूल्यों के साथ। जब 2.5 लाख लोग ‘जिम्मेदार एआई’ की शपथ लेते हैं, तो वे डीपफेक और डेटा चोरी जैसी चुनौतियों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच तैयार करते हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


