मालदा/भागलपुर | 28 फरवरी, 2026: पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने रेल परिचालन को आधुनिक और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शुक्रवार, 27 फरवरी को भागलपुर–हंसडीहा सेक्शन के दानरे हॉल्ट में तीसरी ‘सिंगल लाइन इंटरमीडिएट ब्लॉक सिग्नलिंग’ (IBS) प्रणाली को सफलतापूर्वक कमीशन कर दिया गया है。
क्या है IBS और इससे यात्रियों को क्या होगा फायदा?
मंडल रेल प्रबंधक (DRM) श्री मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में शुरू की गई यह प्रणाली रेल यात्रा के अनुभव को पूरी तरह बदलने वाली है:
- कम होगा ट्रेनों का इंतजार: नई IBS प्रणाली के लागू होने से लंबे ब्लॉक सेक्शन को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया गया है। इसका मतलब है कि अब एक ही दिशा में जाने वाली दो ट्रेनों के बीच का अंतराल कम हो जाएगा और एक के पीछे दूसरी ट्रेन जल्दी छोड़ी जा सकेगी।
- समयपालन (Punctuality) में सुधार: सेक्शनल क्षमता बढ़ने से यात्री और मालगाड़ियों के परिचालन की गति बढ़ेगी, जिससे ट्रेनों के लेट होने की संभावना काफी कम हो जाएगी।
- सुरक्षा का ‘डिजिटल’ पहरा: इस सिस्टम में UFSBI (यूनिवर्सल फेलसेफ ब्लॉक इंटरफेस) और MSDAC (मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर) जैसी अत्याधुनिक तकनीकें लगाई गई हैं, जो ट्रेन की सटीक लोकेशन बताती हैं और मानवीय भूल की गुंजाइश खत्म करती हैं।
चरणबद्ध विस्तार: सांझा और पुनसिया के बाद अब दानरे
वरिष्ठ मंडलीय सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता (Sr. DSTE) श्री राजेंद्र कुमार की देखरेख में संपन्न हुई यह कमीशनिंग मालदा मंडल की निरंतर प्रगति का हिस्सा है:
- सबसे पहले सांझा और पुनसिया हॉल्ट में यह तकनीक सफलतापूर्वक स्थापित की गई थी।
- दानरे हॉल्ट अब इस सेक्शन का तीसरा ऐसा स्टेशन बन गया है जो उन्नत सिग्नलिंग तकनीक से लैस है।
- निर्बाध संचालन: खास बात यह रही कि इस जटिल तकनीकी काम के दौरान ट्रेन संचालन में किसी प्रकार की बाधा नहीं आई。
तकनीकी शब्दावली: आसान भाषा में समझें
VOB का नजरिया: आत्मनिर्भर और आधुनिक रेलवे की ओर कदम
भागलपुर-हंसडीहा रेलखंड सामरिक और व्यावसायिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। अक्सर इस सिंगल लाइन सेक्शन पर ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए घंटों खड़ा रहना पड़ता था। दानरे हॉल्ट में IBS लगने से अब न केवल ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि रेलवे की ‘लाइन कैपेसिटी’ बढ़ने से भविष्य में इस रूट पर नई ट्रेनें शुरू करने का रास्ता भी साफ होगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


