बिहार के किसानों को दिल्ली से बड़ी राहत: धान अधिप्राप्ति में ‘फोर्टीफाइड चावल’ की अनिवार्यता खत्म; अब 31 मार्च तक होगा धान का उठाव

पटना | 28 फरवरी, 2026: बिहार के किसानों और पैक्स (PACS) समितियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य की खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह के प्रयासों के बाद भारत सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए फोर्टीफाइड चावल (FRK) की अनिवार्यता को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। इस फैसले से धान अधिप्राप्ति (Procurement) की प्रक्रिया में आ रही सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई है।

क्या है ये फैसला और क्यों है जरूरी?

​अब तक मिलरों के लिए चावल की आपूर्ति के समय उसमें फोर्टीफाइड चावल (पोषक तत्वों से भरपूर कृत्रिम चावल) मिलाना अनिवार्य था। लेकिन इसकी आपूर्ति धीमी होने के कारण सीएमआर (CMR) जमा करने में भारी देरी हो रही थी।

इस निर्णय के 3 मुख्य प्रभाव:

  1. पैक्स पर बोझ कम: अब बिना फोर्टीफाइड चावल मिलाए ही मिलर चावल की आपूर्ति कर सकेंगे, जिससे पैक्स पर बकाया ‘अधिभार’ की समस्या खत्म हो जाएगी।
  2. तेज होगी प्रक्रिया: सीएमआर जमा करने की रफ्तार बढ़ेगी, जिससे मिलरों और पैक्स के बीच तालमेल बेहतर होगा।
  3. किसानों को सीधा लाभ: धान का उठाव तेजी से होगा, जिससे किसानों को उनके भुगतान में देरी नहीं होगी।

मंत्री लेशी सिंह का ‘मिशन दिल्ली’ सफल

​मंत्री लेशी सिंह ने बताया कि उन्होंने 16 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर बिहार के किसानों की समस्याओं को मजबूती से रखा था।

  • समय सीमा बढ़ी: धान अधिप्राप्ति की अंतिम तिथि जो पहले 28 फरवरी थी, उसे बढ़ाकर अब 31 मार्च 2026 कर दिया गया है।
  • लक्ष्य बढ़ाने की कोशिश: वर्तमान में धान खरीद का लक्ष्य 36.85 लाख मीट्रिक टन है, जिसे मंत्री ने 45 लाख मीट्रिक टन तक ले जाने का भरोसा जताया है।

अब तक की प्रगति: एक नजर में

​बिहार में धान अधिप्राप्ति का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। ताज़ा आंकड़े निम्नलिखित हैं:

विवरण

आंकड़े (खरीफ 2025-26)

कुल निर्धारित लक्ष्य

36.85 लाख मीट्रिक टन

अब तक की अधिप्राप्ति

30.34 लाख मीट्रिक टन

लक्ष्य का प्रतिशत

82.33%

लाभान्वित किसान

4.44 लाख

सक्रिय समितियां

6879

VOB का नजरिया: ‘डेडलाइन’ का बढ़ना बड़ी जीत

​बिहार जैसे राज्य में जहाँ खेती मानसून और संसाधनों पर निर्भर है, वहां 28 फरवरी की समय सीमा किसानों के लिए हमेशा कम पड़ती थी। फोर्टीफाइड चावल की अनिवार्यता हटाना और समय सीमा को एक महीना बढ़ाना, सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। अब जिम्मेदारी स्थानीय अधिकारियों की है कि वे ‘बिचौलियों’ को दूर रखकर वास्तविक किसानों से धान की खरीद सुनिश्चित करें।

“विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि अधिप्राप्ति कार्य में पूरी पारदर्शिता और दक्षता बरती जाए ताकि एक भी पात्र किसान लाभ से वंचित न रहे।”लेशी सिंह, मंत्री

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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