
पटना | 28 फरवरी, 2026: बिहार में हाशिए पर खड़े समाज के बच्चों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य का गलियारा अब और अधिक मजबूत होने जा रहा है। होली के शुभ अवसर पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने विभाग का ‘रिपोर्ट कार्ड’ पेश करते हुए कई क्रांतिकारी घोषणाएं की हैं। मंत्री ने साफ कर दिया है कि अब बाबा साहेब के नाम पर चलने वाले स्कूलों में न केवल पढ़ाई होगी, बल्कि बच्चों की सेहत की सुरक्षा के लिए ‘इमरजेंसी’ इंतजाम भी मौजूद रहेंगे।
शिक्षा के साथ ‘हेल्थ’ का सुरक्षा कवच
मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने शुक्रवार को पत्रकार होली मिलन समारोह के दौरान स्पष्ट किया कि विभाग अब छात्रों की मूलभूत सुविधाओं पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है:
- 24/7 स्वास्थ्य कर्मी: डॉ. भीमराव अम्बेडकर आवासीय विद्यालयों में अब स्वास्थ्य कर्मियों की स्थायी तैनाती होगी। ये कर्मी विद्यालय परिसर में ही 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे।
- बहुउद्देशीय वाहन: किसी भी आपातकालीन स्थिति में छात्रों को अस्पताल पहुँचाने या अन्य जरूरतों के लिए प्रत्येक विद्यालय को ‘मल्टीपर्पस व्हीकल’ (बहुउद्देशीय वाहन) उपलब्ध कराया जाएगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर: 40 नए विद्यालयों की नींव
बिहार में फिलहाल 91 आवासीय विद्यालय संचालित हैं, लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने विस्तार की योजना बनाई है:
- 720 सीटों की क्षमता: राज्य में 40 नए आवासीय विद्यालय जल्द ही खुलेंगे, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 720 सीटों की होगी।
- नामांकन की होड़: सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 1 और 6 में नामांकन हेतु 1 लाख 3 हजार 195 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो इन स्कूलों की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
छात्रवृत्ति और अनुदान: एक नजर में
सामुदायिक विकास: 4800 भवनों का निर्माण
मंत्री ने बताया कि केवल शिक्षा ही नहीं, सामाजिक जुड़ाव के लिए भी काम हो रहा है। राज्य के एससी-एसटी टोलों में अब तक 4800 सामुदायिक भवन बनाए जा चुके हैं। शेष बचे टोलों का सर्वे कराकर वहां भी निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।
VOB का नजरिया: बजट बढ़ रहा है, अब ‘क्वालिटी’ की बारी
छात्रवृत्ति दोगुनी करना और स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती का फैसला काबिले तारीफ है। लेकिन ‘वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि इन 40 नए स्कूलों के निर्माण की गुणवत्ता और पुराने स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना असली चुनौती होगी। अगर हेल्थ वर्कर केवल कागजों पर बहाल न होकर धरातल पर बच्चों के साथ रहेंगे, तभी यह ‘होली का तोहफा’ सार्थक सिद्ध होगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


