
सिलचर (असम) | 28 फरवरी, 2026: असम के सिलचर से एक ऐसी जघन्य वारदात सामने आई है जिसने कानून-व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। रामनगर बाईपास रोड पर 19 फरवरी की रात सात दरिंदों ने एक 28 वर्षीय युवती के साथ उस समय गैंगरेप किया, जब वह अपने मंगेतर के साथ थी। हैवानियत का आलम यह था कि बदमाशों ने न केवल शारीरिक शोषण किया, बल्कि डिजिटल माध्यम से रुपयों की उगाही भी की।
लॉन्ग ड्राइव बनी ‘खौफनाक रात’
पीड़िता अपने होने वाले पति (मंगेतर) के साथ कार में लॉन्ग ड्राइव पर निकली थी। रामनगर बाईपास के पास पहुँचते ही:
- घेराबंदी: लगभग सात बदमाशों ने उनकी कार को जबरन रुकवाया।
- बंधक: बदमाशों ने मंगेतर की गर्दन पर चाकू रख उसे बंधक बना लिया।
- सामूहिक दुष्कर्म: मंगेतर के सामने ही सातों आरोपियों ने युवती के साथ बारी-बारी से दरिंदगी की।
डिजिटल लूट: ‘PhonePe’ पर वसूली
अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने इस वारदात को ‘वसूली’ का जरिया भी बनाया।
- ऑनलाइन ट्रांसफर: डरा-धमकाकर पीड़िता से 10,000 रुपये अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करवाए।
- कैश की लूट: पास में रखे 10,000 रुपये नकद भी छीन लिए। यानी कुल 20,000 रुपये की लूट को अंजाम दिया गया।
पुलिसिया कार्रवाई: एक गिरफ्तार, 6 अब भी फरार
घटना के बाद असम पुलिस में हड़कंप मच गया है:
- मेडिकल और बयान: पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है और मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 के तहत बयान दर्ज कर लिए गए हैं।
- पहली सफलता: पुलिस ने एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
- छापेमारी: बाकी छह फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
आक्रोश: फांसी की मांग और सियासी उबाल
इस घटना ने पूरे असम में गुस्से की लहर पैदा कर दी है। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव सहित कई प्रमुख नेताओं ने राज्य के गृह विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की है। सोशल मीडिया पर लोग दरिंदों के लिए ‘फांसी’ की सजा की मांग कर रहे हैं।
VOB का नजरिया: डिजिटल ट्रेल बनेगी काल!
सिलचर की यह घटना रोंगटे खड़े कर देने वाली है। लेकिन एक बात साफ है—आरोपियों ने पैसे अपने खाते में ट्रांसफर करवाकर पुलिस को सबसे बड़ा सुराग दे दिया है। ‘डिजिटल लूट’ के इस दौर में अपराधी अक्सर खुद ही अपने पीछे सबूतों की लकीर छोड़ जाते हैं। उम्मीद है कि पुलिस इस ‘डिजिटल ट्रेल’ का इस्तेमाल कर बाकी छह दरिंदों को जल्द सलाखों के पीछे पहुँचाएगी। ऐसी जगहों पर पुलिस गश्त (Patrolling) का अभाव अपराधियों के हौसले बुलंद करता है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


