सूरत/पटना 27 फरवरी, 2026: गुजरात के सूरत से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। एक हँसता-खेलता परिवार, जो सूदखोर के कर्ज और मानसिक प्रताड़ना के जाल में ऐसा फँसा कि मौत को गले लगाना ही उसे एकमात्र रास्ता दिखा। इस सामूहिक आत्महत्या में 7 साल की एक मासूम बच्ची ही इकलौती गवाह और जीवित बची सदस्य है, जिसने उस काली सुबह की पूरी कहानी बयां की है।
“मम्मी ने कुछ पीने को दिया…” — मासूम की दास्तां
7 वर्षीय पार्थिवी, जो अब इस दुनिया में अकेली रह गई है, ने पुलिस को वह बातें बताई हैं जो किसी का भी कलेजा चीर दें:
- अंतिम दृश्य: पार्थिवी ने बताया कि सुसाइड से ठीक पहले उसके मम्मी-पापा (बालमुकुंद और प्रियंका) एक नोटबुक में कुछ लिख रहे थे। पुलिस का मानना है कि यह वही 3 पन्नों का सुसाइड नोट था जो मौके से बरामद हुआ है।
- मौत का प्याला: मासूम के अनुसार, उसकी माँ ने ही उसे और उसकी बड़ी बहन (भाव्या) को कुछ पीने के लिए दिया था, जिसके बाद सबकी तबीयत बिगड़ने लगी।
- कुदरत का करिश्मा: पार्थिवी की जान इसलिए बच गई क्योंकि उसे जहर पीने के बाद उल्टी (Vomit) हो गई थी, जिससे जहर का असर कम हो गया। उसने ही हिम्मत दिखाकर घर का दरवाजा खोला, जिसके बाद पड़ोसियों को मामले की जानकारी हुई।
सुसाइड नोट में ‘वैभव रुंगटा’ के जुल्मों की गाथा
पुलिस को मौके से जो 3 पन्नों का सुसाइड नोट मिला है, वह किसी डरावनी कहानी से कम नहीं है। प्रियंका ने अपनी मौत से पहले वैभव रुंगटा नामक सूदखोर की क्रूरता का कच्चा चिट्ठा खोला है:
- जबरन वसूली: वैभव रुंगटा उधार के पैसों के बदले लगातार परिवार का मानसिक उत्पीड़न कर रहा था।
- आर्थिक डकैती: आरोपी ने पीड़ित का क्रेडिट कार्ड अपने पास रख लिया था और उससे 1.59 लाख रुपये की जमकर शॉपिंग की थी।
- संपत्ति पर कब्जा: आरोपी ने उनकी मोपेड (गाड़ी) भी जबरन जब्त कर ली थी।
घटनाक्रम: 24 फरवरी की वह काली सुबह
- सुबह 11:00 बजे: बालमुकुंद और प्रियंका ने बेटियों को जहर देकर खुद भी जान देने की कोशिश की।
- आखिरी कॉल: प्रियंका ने अपने पिता संजय अग्रवाल को फोन कर बस इतना कहा— “पापा, मेरे पति बेहोश हो गए हैं, आप घर आ जाओ।”
- अस्पताल में मौत: बालमुकुंद की मौत मौके पर ही हो गई थी, जबकि प्रियंका और 9 साल की भाव्या ने अगले दिन यानी बुधवार सुबह दम तोड़ दिया।
VOB का नजरिया: ‘सूदखोरी’ समाज के लिए कैंसर
सूरत की यह घटना केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता भी है। जब कोई अवैध साहूकार किसी परिवार की गाड़ी और क्रेडिट कार्ड तक छीन ले और उन्हें मौत की दहलीज तक धकेल दे, तो यह ‘इंस्टीट्यूशनल मर्डर’ (संस्थागत हत्या) की श्रेणी में आता है। आरोपी वैभव रुंगटा फिलहाल फरार है। पुलिस का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद ही कई और राज खुलेंगे।
एक मासूम बच्ची का अनाथ होना इस बात का प्रमाण है कि अवैध कर्ज का व्यापार मासूमों का भविष्य लील रहा है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


