पटना | 27 फरवरी, 2026: बिहार विधानसभा के बजट सत्र का समापन आज किसी सियासी बहस के साथ नहीं, बल्कि होली के सतरंगी रंगों और ‘बख्शीश’ की बारिश के साथ हुआ। जहाँ एक ओर पक्ष-विपक्ष के नेता एक-दूसरे को गुलाल लगाकर गिले-शिकवे मिटा रहे थे, वहीं कुचायकोट से जेडीयू विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय (पप्पू पांडे) ने अपने अनोखे अंदाज से पूरी महफिल लूट ली।
जब विधानसभा में होने लगी ‘नोटों की बारिश’
सत्र खत्म होने के बाद विधानसभा पोर्टिको में जो नजारा दिखा, उसने सबको हैरान कर दिया। विधायक अमरेंद्र पांडेय ने होली के उपलक्ष्य में वहां मौजूद विधानसभा कर्मियों को बख्शीश देना शुरू किया।
- मच गई होड़: देखते ही देखते कर्मचारी और सहयोगियों की भारी भीड़ उन्हें घेरने लगी।
- पैसा उछालने का स्वैग: भीड़ इतनी बढ़ गई कि विधायक जी को अंत में हवा में नोट उछालने पड़े। नोटों को लपकने के लिए कर्मियों के बीच जबरदस्त उत्साह और होड़ देखने को मिली।
“गरीब का बेटा हूं, दुनिया जीत कर भी सिकंदर खाली हाथ गया”
जब उनके इस ‘अंदाज’ के बारे में पूछा गया, तो अमरेंद्र पांडेय ने एक गहरा दार्शनिक जवाब दिया:
”होली महापर्व है और कोई भी त्योहार अकेले नहीं, सबके साथ मनाना चाहिए। जब भी सत्र के दौरान कोई पर्व आता है, मैं अपने विधानसभा के भाइयों का सहयोग करता हूं। मैं बस इतना जानता हूं कि खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाना है।”
उन्होंने सिकंदर महान का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस सिकंदर ने दुनिया जीती, उसने भी मरते वक्त हाथ बाहर रखने को कहा था ताकि दुनिया देखे कि वह खाली हाथ जा रहा है। उन्होंने खुद को एक गरीब का बेटा बताते हुए कहा कि वे अपना सबकुछ गरीबों के लिए झोंक देने का जज्बा रखते हैं।
आस्था और दान का पुराना नाता
यह पहली बार नहीं है जब अमरेंद्र पांडेय अपनी दरियादिली के लिए चर्चा में आए हैं।
- थावे मंदिर दान: बीते दिसंबर महीने में जब प्रसिद्ध थावे मंदिर में चोरी हुई थी, तब विधायक ने अपनी ओर से मुकुट और माला सहित 5 सोने के जेवर चढ़ाकर मंदिर की शोभा वापस लौटाई थी।
VOB का नजरिया: सियासत में ‘दिल’ का कनेक्शन?
अमरेंद्र पांडेय का यह ‘अंदाज’ कुछ लोगों के लिए विवादित हो सकता है, लेकिन विधानसभा के निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए यह होली की बड़ी खुशी बनकर आया। राजनीति में जहाँ अक्सर नेता वोटों का हिसाब रखते हैं, वहां ‘सिकंदर’ और ‘खाली हाथ’ की फिलॉसफी देना उनके समर्थकों के बीच उन्हें एक अलग पहचान देता है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


