पटना | 27 फरवरी, 2026: राजधानी पटना को उत्तर बिहार से जोड़ने वाली लाइफलाइन, महात्मा गांधी सेतु पर शुक्रवार की शाम एक बार फिर अफरा-तफरी का माहौल रहा। पुल के पिलर संख्या 46 के पास हुए एक भीषण सड़क हादसे ने यातायात व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया। एक अनियंत्रित ट्रक ने न केवल डिवाइडर से टक्कर मारी, बल्कि एक निर्दोष बाइक सवार की जान को भी जोखिम में डाल दिया।
पिलर नंबर 46 पर ‘मौत का तांडव’
हादसा पटना से हाजीपुर जाने वाली लेन में हुआ। चश्मदीदों के मुताबिक:
- अनियंत्रित रफ्तार: ट्रक की रफ्तार इतनी तेज थी कि वह अचानक संतुलन खो बैठा और सीधे डिवाइडर से जा टकराया।
- बाइक सवार चपेट में: ट्रक की चपेट में आने से एक बाइक सवार गंभीर रूप से जख्मी हो गया।
- फरिश्ता बने स्थानीय लोग: हादसे के तुरंत बाद स्थानीय नागरिकों ने साहस दिखाया और घायल को मलबे से निकालकर तत्काल NMCH अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उसका इलाज जारी है।
ट्रैफिक का हाल: एक ही लेन से परिचालन
हादसे के बाद पुल पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचा:
- पुलिस मोर्चा: ट्रैफिक थाना जीरो माइल, आलमगंज थानाध्यक्ष और ओपी प्रभारी ने मोर्चा संभाल लिया है।
- क्रेन का इंतजार: दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने के लिए क्रेन को सूचित किया गया है।
- धीमी रफ्तार: फिलहाल पुल पर केवल एक ही लेन से गाड़ियों को निकाला जा रहा है, जिससे यात्रियों को भारी जाम और धीमी गति का सामना करना पड़ रहा है।
गायघाट चौराहे पर उमड़ा ‘तमाशबीन’ हुजूम
हादसे की खबर मिलते ही पुल के नीचे गायघाट चौराहे पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे पुलिस को कानून-व्यवस्था संभालने में दोहरी मशक्कत करनी पड़ी। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने लाठी के बल पर भीड़ को वहां से हटाया ताकि एम्बुलेंस और आपातकालीन वाहनों का रास्ता न रुके।
प्रशासन की अपील:
“पुल पर परिचालन सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। यात्रियों से अनुरोध है कि वे धैर्य बनाए रखें, लेन न तोड़ें और यातायात नियमों का पालन करें ताकि क्रेन और पुलिस अपना काम तेजी से कर सके।” — यातायात पुलिस, पटना
VOB का नजरिया: क्या भारी वाहनों की रफ्तार पर लगाम जरूरी है?
महात्मा गांधी सेतु पर अक्सर होने वाले इन हादसों के पीछे अनियंत्रित ट्रक और ओवरस्पीडिंग एक बड़ी वजह रही है। संकरी लेन और भारी दबाव के बीच एक छोटी सी गलती घंटों का जाम और जान-माल का नुकसान लेकर आती है। प्रशासन को चाहिए कि पुल पर ‘स्पीड रडार’ और निगरानी और कड़ी करे।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


