त्रिवेणीगंज में ‘ऑपरेशन’ के बाद मातम: 24 वर्षीय रूबी की मौत पर भड़का गुस्सा; NH 327 E पर शव रख परिजनों का भारी प्रदर्शन

त्रिवेणीगंज/सुपौल | 27 फरवरी, 2026: सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। जिस अस्पताल में लोग ‘सुरक्षित भविष्य’ की उम्मीद लेकर पहुँचते हैं, वहां एक युवा माँ की जिंदगी का अंत हो गया। परिवार नियोजन ऑपरेशन के बाद हुई इस मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 327 E) को पूरी तरह जाम कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

​त्रिवेणीगंज के कसहा निवासी दिनेश यादव की 24 वर्षीय पत्नी रूबी कुमारी को परिवार नियोजन के छोटे से ऑपरेशन के लिए अस्पताल लाया गया था।

  • लापरवाही का आरोप: परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद रूबी की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उन्होंने बार-बार डॉक्टरों और नर्सों को बुलाया, लेकिन समय पर उचित देखभाल नहीं मिली।
  • अस्पताल में मौत: शनिवार सुबह रूबी ने अस्पताल के बिस्तर पर ही दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही परिजनों का धैर्य टूट गया और उन्होंने अस्पताल प्रशासन को इस मौत का जिम्मेदार ठहराया।

सड़क पर संग्राम: NH 327 E जाम

​गुस्साए ग्रामीणों और परिजनों ने रूबी का शव अस्पताल के ठीक सामने हाईवे पर रख दिया।

  • नारेबाजी: प्रशासन और लापरवाह डॉक्टरों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
  • ट्रैफिक जाम: करीब डेढ़ घंटे तक हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।
  • दोबारा जाम: पुलिस और बीडीओ (BDO) ने एक बार जाम खुलवाया था, लेकिन ठोस कार्रवाई न होते देख लोग दोबारा सड़क पर उतर आए हैं।

परिजनों की 3 मुख्य मांगें:

    1. दोषियों पर FIR: लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
    2. निष्पक्ष जांच: पूरे मामले की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाए।
    3. मुआवजा: मृतका के छोटे बच्चों और परिवार के भविष्य के लिए उचित सरकारी मुआवजे की घोषणा की जाए।

VOB का नजरिया: क्या ‘टारगेट’ पूरा करने के चक्कर में जा रही हैं जानें?

बिहार में परिवार नियोजन ऑपरेशन के बाद महिलाओं की मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। अक्सर ‘कैंप’ या ‘स्पेशल ड्राइव’ के दौरान जल्दबाजी में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है। 24 साल की महिला का एक रूटीन ऑपरेशन के बाद मर जाना महज ‘इत्तेफाक’ नहीं हो सकता। यह सिस्टम की उस सड़न को दर्शाता है जहाँ गरीब की जान की कीमत महज एक ‘आश्वासन’ बनकर रह गई है।

 

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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