बिहार में अवैध कब्जे की जांच होगी: किशनगंज में विशेष समिति गठित करेगी बिहार सरकार

Government of Bihar ने नेपाल और बांग्लादेश सीमा से सटे सीमांचल क्षेत्र में अवैध कब्जा और घुसपैठ के आरोपों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। शुक्रवार को विधानसभा के बजट सत्र के दौरान डिप्टी सीएम Vijay Kumar Sinha ने घोषणा की कि मुस्लिम बहुल Kishanganj district में बाहर से आए लोगों द्वारा स्थानीय जमीनों पर कथित कब्जे की जांच के लिए विशेष समिति गठित की जाएगी।

ठाकुरगंज से जदयू विधायक Neeraj Kumar Agarwal ने गैर-सरकारी संकल्प के माध्यम से यह मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि दिघलबैंक प्रखंड में बीते 40 वर्षों के दौरान भूदान की जमीनें, जो स्थानीय दलित, आदिवासी और गरीब मुस्लिम परिवारों के नाम आवंटित थीं, उन पर बाहरी लोगों ने कब्जा कर लिया है। विधायक के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में प्रखंड की लगभग 90 प्रतिशत जमीनें Malda district और Murshidabad district से आए लोगों के कब्जे में चली गई हैं।

विधायक ने राज्य सरकार से इन जमीनों का भौतिक सत्यापन कर अवैध कब्जा हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह समस्या पूरे किशनगंज जिले में फैली हुई है और ठाकुरगंज विधानसभा क्षेत्र ‘चिकन नेक’ यानी रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील इलाके में स्थित है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा का पहलू भी जुड़ा है।

शुरुआत में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री सह डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि जिलाधिकारी की रिपोर्ट में मालदा और मुर्शिदाबाद से आए लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर कब्जे का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी जमीन का अवैध हस्तांतरण या खरीद-बिक्री पाई जाती है तो संबंधित जमाबंदी और बंदोबस्ती रद्द की जाएगी और सरकार को वैधानिक कार्रवाई का पूरा अधिकार है।

हालांकि, डिप्टी सीएम ने विधायक द्वारा उठाई गई चिंताओं को गंभीर बताते हुए विशेष समिति गठित कर पूरे किशनगंज जिले में मामलों की जांच कराने का आश्वासन दिया। सरकार के इस कदम से सीमांचल क्षेत्र में जमीन संबंधी विवादों और अवैध कब्जे की शिकायतों के समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।

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