बिहार विधानसभा का बजट सत्र आज अपने 19वें और अंतिम दिन में प्रवेश कर गया, लेकिन समापन से पहले सदन का माहौल काफी गरम रहा। राजद और वामपंथी दलों के विधायकों ने 94 लाख गरीब परिवारों को घोषित आर्थिक सहायता नहीं मिलने का मुद्दा उठाते हुए जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन किया।
पोस्टर लेकर सदन में उतरा विपक्ष
विपक्षी सदस्यों ने पोस्टरों के साथ प्रदर्शन करते हुए मांग की कि जातीय गणना में चिन्हित 94 लाख गरीब परिवारों को सरकार द्वारा घोषित 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि तत्काल दी जाए। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने घोषणा तो कर दी, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर लाभ नहीं पहुंचा है।
भाई वीरेंद्र का सरकार पर हमला
राजद के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने सदन में सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार सिर्फ घोषणाएं करती है, लेकिन उन्हें लागू नहीं करती। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों को मकान के लिए घोषित राशि तुरंत दी जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास धन नहीं है, फिर भी बड़े-बड़े ऐलान किए जा रहे हैं। भाई वीरेंद्र ने इसे गरीबों के साथ ठगी बताते हुए कहा कि जनता को भ्रमित किया जा रहा है।
घोषणा बनाम क्रियान्वयन पर सवाल
विपक्ष का कहना है कि जब सरकार ने सार्वजनिक मंचों और बजट भाषण में 94 लाख गरीब परिवारों को सहायता देने की बात कही थी, तो अब भुगतान में देरी क्यों हो रही है। यह मुद्दा पूरे सत्र के दौरान बार-बार उठता रहा और अंतिम दिन भी चर्चा का केंद्र बना रहा।
हंगामे के बीच कार्यवाही स्थगित
दोपहर तक बढ़ते शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही भोजनावकाश तक के लिए स्थगित कर दी गई। अवकाश के बाद गैर-सरकारी संकल्पों पर चर्चा निर्धारित है। हालांकि ये संकल्प बाध्यकारी नहीं होते, लेकिन सरकार की नीतियों पर प्रभाव डाल सकते हैं।
सत्र के दौरान कई विधेयक पारित
पूरे बजट सत्र में विभिन्न विभागों के बजट पर चर्चा हुई और कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। सरकार ने अपनी उपलब्धियां गिनाईं, जबकि विपक्ष ने बेरोजगारी, गरीबी और आर्थिक सहायता जैसे मुद्दों को लेकर लगातार घेराबंदी की।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अंतिम दिन सरकार विपक्ष के आरोपों का क्या जवाब देती है और गैर-सरकारी संकल्पों पर क्या रुख अपनाती है। बजट सत्र का समापन राज्य की राजनीति की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।


