बिहार विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन धर्म परिवर्तन को लेकर सख्त कानून बनाने की मांग जोर-शोर से उठी। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए सत्ता पक्ष के कई विधायकों ने यह मुद्दा सदन में रखा। इस दौरान मिथिलेश तिवारी, वीरेंद्र कुमार जनक सिंह, संजय कुमार सिंह, जीवेश कुमार, तारकेश्वर प्रसाद, बैद्यनाथ प्रसाद समेत कुल 18 विधायकों ने कानून बनाने की मांग की।
यूपी-मध्य प्रदेश की तर्ज पर कानून की मांग
विधायकों ने कहा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात सहित कई राज्यों में धर्म परिवर्तन को लेकर सख्त कानून लागू है। इन राज्यों में धोखाधड़ी, प्रलोभन या दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन कराने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। उन्होंने मांग की कि बिहार में भी इसी तरह का कानून लागू किया जाए।
बीजेपी विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना में बदलाव देखने को मिल रहा है और इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
सत्तापक्ष के विधायकों के आरोप
कुछ विधायकों ने दावा किया कि राज्य में चर्चों की संख्या बढ़ी है और सीमांचल क्षेत्र में मुस्लिम आबादी में वृद्धि हुई है। उनका कहना था कि कथित तौर पर प्रलोभन और दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन कराए जा रहे हैं और इसके खिलाफ सख्त कानून की जरूरत है।
बीजेपी विधायक जीवेश कुमार ने कहा कि धर्म परिवर्तन और आरक्षण के मुद्दे पर स्पष्ट नीति होनी चाहिए। वहीं विधायक संजय कुमार सिंह ने इसे गंभीर सामाजिक विषय बताते हुए कड़े कानून की मांग की।
सरकार का स्पष्ट जवाब
मामले पर जवाब देते हुए पर्यटन सह कला एवं संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने साफ कहा कि फिलहाल राज्य सरकार के पास धर्म परिवर्तन पर नया कानून लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
स्पीकर ने कहा- सरकार करेगी समीक्षा
विवाद बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने हस्तक्षेप किया और कहा कि विषय को नियमन दे दिया गया है। सरकार इसकी समीक्षा करेगी और आवश्यकता होने पर उचित निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद इस मुद्दे पर आगे चर्चा नहीं हुई।
सदन में उठे इस मुद्दे के बाद राज्य की राजनीति में धर्म परिवर्तन कानून को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। आने वाले समय में सरकार की समीक्षा रिपोर्ट पर सबकी नजर रहेगी।


