बेगूसराय | 27 फरवरी, 2026: बिहार के बेगूसराय से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जो आधुनिक समाज और कानूनी दांव-पेचों के बीच पिसती एक महिला की बेबसी को बयां करती है। 30 वर्षीय रुखसाना खातून के लिए उनका वैवाहिक रिश्ता महज एक ‘व्हाट्सएप मैसेज’ बनकर रह गया। पति ने न केवल फोन पर तलाक दिया, बल्कि अब दोबारा साथ रखने के लिए ‘हलाला’ जैसी घिनौनी शर्त रख दी है।
व्हाट्सएप पर टूटा 2 साल का रिश्ता
पोखरिया निवासी मोहम्मद मकबूल (34) और रुखसाना की शादी 11 मार्च 2022 को हुई थी। आरोप है कि शादी के कुछ ही समय बाद से ही दहेज और पैसों की भूख ने रिश्ते में कड़वाहट घोल दी।
- तीन शब्द और खत्म रिश्ता: पति ने मोबाइल पर ‘तलाक, तलाक, तलाक’ लिखकर रुखसाना से संबंध तोड़ लिए।
- अमानवीय शर्त: जब रुखसाना ने दोबारा साथ रहने की गुहार लगाई, तो पति ने कथित तौर पर अपने ही पिता (ससुर) के साथ ‘हलाला’ करने की शर्त रख दी।
‘बिजनेस’ के नाम पर 17 लाख की लूट
पीड़िता का आरोप है कि उसका पति केवल दहेज का लालची नहीं, बल्कि एक शातिर ठग भी है। रुखसाना ने अपनी और अपने परिवार की जमा-पूंजी उस पर लुटा दी:
- मां के गहने: बेटी का घर बचाने के लिए मां ने अपने गहने गिरवी रखकर 5 लाख रुपये दिए।
- बेटी की एफडी: पहली शादी से हुई बेटी के भविष्य के लिए रखी गई 1.40 लाख रुपये की एफडी भी पति ने तुड़वा ली।
- कुल ठगी: पीड़िता का दावा है कि ‘बिजनेस’ शुरू करने और अन्य बहानों से अब तक करीब 16-17 लाख रुपये हड़प लिए गए हैं।
चरित्र हनन और मासूम का तिरस्कार
जून 2023 में जब रुखसाना ने एक बेटे को जन्म दिया, तो पति की क्रूरता और बढ़ गई।
- पितृत्व पर सवाल: पति ने न केवल बच्चे को अपना मानने से इनकार कर दिया, बल्कि रुखसाना के चरित्र पर भी गंभीर लांछन लगाए।
- हिंसा: जुलाई 2022 में जब परिवार ने रकम वापस मांगी, तो कथित तौर पर उन पर जानलेवा हमला भी कराया गया।
न्याय की आस: महिला आयोग की चौखट पर
पिछले दो वर्षों से थानों के चक्कर काट रही रुखसाना को जब स्थानीय स्तर पर कोई ठोस मदद नहीं मिली, तो उसने गुरुवार को महिला आयोग में अपनी गुहार लगाई।
”मैं पिछले 2 साल से भटक रही हूँ। पुलिस में शिकायत की लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। उसने मेरा सब कुछ लूट लिया और अब मुझे और मेरे बच्चे को बेसहारा छोड़ दिया है।”
— रुखसाना खातून (पीड़िता)
VOB का नजरिया: कानून के बावजूद जारी है कुप्रथाओं का खेल
भारत में ‘तीन तलाक’ (Triple Talaq) को कानूनी रूप से अपराध घोषित किया जा चुका है, इसके बावजूद व्हाट्सएप पर तलाक देना और ‘हलाला’ के नाम पर मानसिक व शारीरिक शोषण करना कानून को सीधी चुनौती है। बेगूसराय का यह मामला केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि पुलिसिया तंत्र की विफलता को भी दर्शाता है कि कैसे एक महिला को एफआईआर और कार्रवाई के लिए 2 साल तक भटकना पड़ा।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


