बिहार में गुप्त मतदान हुआ तो हार जाएगी शराबबंदी? बीजेपी विधायक विनय बिहारी का बड़ा बयान

बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। बेतिया की लौरिया विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक विनय बिहारी ने राज्य की शराबबंदी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अगर विधानसभा में गुप्त मतदान कराया जाए तो शराबबंदी कानून गिर जाएगा।

‘गोपनीय वोटिंग कराइए, सच्चाई सामने आ जाएगी’

विधायक विनय बिहारी ने कहा कि बिहार एक लोकतांत्रिक राज्य है और यहां जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए कानूनों की समीक्षा होनी चाहिए। उनका दावा है कि वर्तमान में लागू शराबबंदी कानून को जनता पूरी तरह स्वीकार नहीं कर रही है और जमीनी स्तर पर इसका असर दिखाई नहीं दे रहा।

उन्होंने सुझाव दिया कि विधानसभा में 243 विधायकों के बीच गुप्त मतदान कराया जाए। पर्ची के जरिए वोटिंग हो और किसी का नाम सार्वजनिक न किया जाए। उनका कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो शराबबंदी के खिलाफ ज्यादा वोट पड़ेंगे और कानून हार जाएगा।

नीतीश कुमार की नीति पर उठाए सवाल

विनय बिहारी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शराबबंदी नीति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यक्रमों और निमंत्रणों में शराब का सेवन खुले तौर पर देखने को मिलता है, जिससे लगता है कि सरकार को इस कानून पर पुनर्विचार करना चाहिए।

महाराष्ट्र मॉडल का दिया उदाहरण

बीजेपी विधायक ने शराबबंदी की समीक्षा के सवाल पर महाराष्ट्र का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि वहां पूर्ण शराबबंदी नहीं है, लेकिन सार्वजनिक स्थान पर शराब पीकर हंगामा करने या नशे में गाड़ी चलाने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। उनके अनुसार, ऐसी व्यवस्था बिहार में भी लागू की जाए तो बेहतर समाधान निकल सकता है।

‘शराबियों से भर रही हैं जेलें’

विनय बिहारी ने दावा किया कि बिहार की जेलें शराबबंदी कानून के मामलों से भरी हुई हैं। उनके अनुसार, छोटे कारोबारी और शराब पीने वाले लोग कुछ दिन या एक-दो महीने में जेल से छूट जाते हैं और फिर से उसी धंधे में लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून में सख्ती के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है।

गाना गाकर कसा तंज

विधायक ने शराबबंदी पर तंज कसते हुए एक भोजपुरी गीत की पंक्तियां भी गाईं—
“बंद बाटे दारू.. लेकिन सगरो बिका ता.. एसपी से बेसी दरोगा कामता..”

उन्होंने कहा कि कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अलग पुलिस बल बनाने की जरूरत है, क्योंकि मौजूदा संसाधन पर्याप्त नहीं हैं।

बिहार में शराबबंदी को लेकर पहले भी पक्ष और विपक्ष के नेता समीक्षा की मांग उठा चुके हैं। ऐसे में विनय बिहारी का यह बयान राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ सकता है।

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