पटना | 27 फरवरी, 2026: बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अंचल कार्यालयों (Block Offices) में पैर पसार चुके दलालों, अनौपचारिक मुंशियों और भू-माफियाओं के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ दी है। विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने सभी जिला समाहर्ताओं (DM) और अपर समाहर्ताओं को कड़ा निर्देश जारी किया है कि अब दलालों की पहचान होने पर केवल चेतावनी नहीं, बल्कि सीधे FIR दर्ज कराई जाएगी।
बीएनएस (BNS) की धाराओं में नपेंगे बिचौलिए
राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया है कि अंचल कार्यालयों में किसी भी बाहरी व्यक्ति का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- सीधे कार्रवाई का अधिकार: अंचल अधिकारियों (CO) को अधिकार दिया गया है कि वे ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसी गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराएं।
- क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान पहचान: वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश है कि वे जब भी अंचल या राजस्व कार्यालयों के भ्रमण पर जाएं, वहां सक्रिय बिचौलियों को चिह्नित कर तुरंत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री की ‘समृद्धि यात्रा’ में खुला ‘दलाली’ का खेल
यह सख्त रुख मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ और उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के ‘भूमि सुधार जन कल्याण संवाद’ के फीडबैक के बाद अपनाया गया है।
- समानांतर कार्यालय का खुलासा: जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि पटना महानगर के संपतचक जैसे इलाकों में सरकारी व्यवस्था के समानांतर बिचौलियों के दफ्तर चल रहे थे।
- अनौपचारिक मुंशी: शहरी क्षेत्रों में काम की अधिकता का बहाना बनाकर ‘हल्का कर्मचारियों’ ने निजी तौर पर ‘सहायक मुंशी’ रख लिए थे, जो भ्रष्टाचार का मुख्य जरिया बने हुए थे।
तीसरी आंख का पहरा: सभी अंचलों में लगेंगे हाई-एंड CCTV
भ्रष्टाचार पर लगाम कसने और पारदर्शिता लाने के लिए विभाग ने तकनीक का सहारा लिया है:
- सीसीटीवी की निगरानी: सभी अंचल कार्यालयों में हाई-एंड सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसके लिए विभाग द्वारा राशि आवंटित की जा चुकी है।
- कर्मचारियों पर भी शिकंजा: यदि किसी सीओ (CO) या हल्का कर्मचारी की बिचौलियों के साथ मिलीभगत पाई जाती है, तो उनके खिलाफ त्रि-सदस्यीय जिलास्तरीय जांच दल गठित कर कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
VOB का नजरिया: क्या ‘रूल ऑफ लॉ’ से सुधरेगा राजस्व प्रशासन?
बिहार में जमीन से जुड़े विवाद और उनमें बिचौलियों की भूमिका अपराध की बड़ी वजह रही है। सरकार का यह फैसला ‘बिचौलिया संस्कृति’ पर चोट करने वाला है। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में भू-माफियाओं के बढ़ते दबाव के बीच, सीसीटीवी और एफआईआर का यह ‘डोज’ आम नागरिकों को राहत दे सकता है। हालांकि, चुनौती यह होगी कि क्या जमीनी स्तर पर कर्मचारी अपने ‘निजी सहायकों’ को हटाने की हिम्मत जुटा पाएंगे?
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


