पटना | 27 फरवरी, 2026: बिहार विधानसभा का मौजूदा सत्र ऐतिहासिक फैसलों का गवाह बन रहा है। गुरुवार को सदन में जनहित से जुड़े छह महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। इनमें सबसे प्रमुख फैसला निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों की मनमानी फीस पर रोक लगाना और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की ‘गुंडा वसूली’ पर लगाम कसना है। इन विधेयकों के कानून बनने के बाद छात्रों, वकीलों और कर्जदारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
1. निजी कॉलेजों की मनमानी खत्म: अब सरकार तय करेगी ‘रेट चार्ट’
अभिभावकों और छात्रों के लिए सबसे बड़ी खबर ‘बिहार निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान (नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण) बिल, 2026’ का पास होना है।
- उच्चस्तरीय समिति: अब राज्य के सभी निजी प्रोफेशनल कॉलेजों (इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट आदि) की फीस एक सरकारी कमेटी तय करेगी।
- कड़ा दंड: यदि कोई संस्थान तय शुल्क से एक रुपया भी ज्यादा लेता है, तो उसे न केवल वह राशि लौटानी होगी, बल्कि उस कॉलेज की सीटों में कटौती भी की जा सकती है।
- पारदर्शिता: कमेटी के अध्यक्ष कोई प्रख्यात शिक्षाविद् या प्रधान सचिव स्तर के सेवानिवृत्त अधिकारी होंगे, जो नामांकन से लेकर परीक्षा तक का पारदर्शी शुल्क ढांचा तैयार करेंगे।
2. माइक्रो फाइनेंस कंपनियों पर ‘डिजिटल’ और ‘कानूनी’ पहरा
सूदखोरी और कर्ज के जाल में फंसकर आत्महत्या करने वाले लोगों के बढ़ते मामलों को देखते हुए ‘बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएं विधेयक’ पारित किया गया है।
- अनिवार्य पंजीकरण: अब कोई भी माइक्रो फाइनेंस कंपनी वित्त विभाग की अनुमति के बिना बिहार में लोन नहीं बांट पाएगी।
- विशेष न्यायालय: कर्ज वसूली के लिए ‘प्रपीड़क कार्रवाई’ (Coercive Action) यानी डराने-धमकाने पर लगाम लगेगी। हर जिले में विशेष न्यायालय गठित होंगे जो सूदखोरी से पीड़ित लोगों के मामलों की सुनवाई करेंगे।
- मंत्री का संदेश: वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने साफ कहा कि अब गुंडों के जरिए वसूली करने वालों पर सख्त शिकंजा कसा जाएगा।
3. वकीलों के लिए ‘कल्याण निधि’ में बढ़ोतरी
अधिवक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए ‘बिहार अधिवक्ता कल्याण निधि (संशोधन) विधेयक’ को मंजूरी दी गई है।
- इसके तहत अब अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि 25 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये कर दी गई है। इससे वकीलों के सामाजिक सुरक्षा कोष में अधिक राशि जमा होगी, जो उनके और उनके परिवार के काम आएगी।
VOB का नजरिया: आम आदमी की जेब और जान की सुरक्षा
सरकार के ये कदम सीधे तौर पर मध्यम और गरीब वर्ग को प्रभावित करेंगे। शिक्षा के नाम पर होने वाली ‘दुकानदारी’ और लोन के नाम पर होने वाली ‘गुंडागर्दी’ बिहार के ग्रामीण इलाकों की बड़ी समस्याएं रही हैं। इन विधेयकों का धरातल पर कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना अब प्रशासन के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


