अररिया/सिकटी | 27 फरवरी, 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने तीन दिवसीय बिहार दौरे के दूसरे दिन सीमांचल की धरती से देश की सुरक्षा और जनसांख्यिकी (Demography) को लेकर अब तक का सबसे कड़ा संदेश दिया है। भारत-नेपाल सीमा से सटे अररिया के सिकटी में ‘बॉर्डर आउट पोस्ट’ (BOP) लेटी और इंदरवा के उद्घाटन के बाद एसएसबी (SSB) जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ किया कि घुसपैठियों को बाहर निकालना मोदी सरकार के लिए केवल चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि एक ‘मिशन’ है।
“वोटर लिस्ट से नाम हटाना काफी नहीं, देश से बाहर करेंगे”
गृह मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि घुसपैठ की समस्या का समाधान केवल प्रशासनिक खानापूर्ति नहीं हो सकता। उनके संबोधन की मुख्य बातें:
- चुन-चुनकर होगी पहचान: उन्होंने घोषणा की कि एक-एक घुसपैठिए को चिह्नित कर उन्हें सीमा पार भेजा जाएगा।
- शुरुआत सीमांचल से: इस अभियान की शुरुआत बिहार के सीमांचल क्षेत्र (पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज) से की जाएगी, जिसके बाद इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।
- केवल चुनावी वादा नहीं: शाह ने याद दिलाया कि बिहार विधानसभा चुनाव में यह एक प्रमुख मुद्दा था और जनता ने विकास के साथ-साथ इस पर भी अपनी मुहर लगाई है।
सुरक्षा के लिए ’10 किमी’ का मास्टर प्लान
अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण रणनीति साझा की:
- सीमा के 10 किमी के अंदर सफाई: देश की सीमाओं के 10 किलोमीटर के दायरे में जितने भी अवैध अतिक्रमण हैं, उन्हें सबसे पहले हटाया जाएगा।
- जनसांख्यिकी बदलाव पर ‘हाई-लेवल कमेटी’: सीमावर्ती क्षेत्रों में बदलती आबादी के स्वरूप के अध्ययन के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में कड़ी कार्रवाई होगी।
- संस्कृति और भूगोल का खतरा: उन्होंने आगाह किया कि घुसपैठ से होने वाला जनसांख्यिकी परिवर्तन देश की संस्कृति, इतिहास और भूगोल के लिए ‘खतरनाक’ है।
पश्चिम बंगाल के लिए भी ‘फर्स्ट एजेंडा’ तय
गृह मंत्री ने पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जब भी बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी, उनका पहला काम सीमा पर बाड़ लगाने का काम पूरा करना और घुसपैठियों को बाहर भेजना होगा।
VOB का नजरिया: सीमांचल ही क्यों बना ‘सेंटर पॉइंट’?
अमित शाह का सीमांचल से इस अभियान की शुरुआत की घोषणा करना राजनीतिक और सुरक्षा, दोनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं के करीब होने के कारण लंबे समय से घुसपैठ और ‘डेमोग्राफिक चेंज’ की चर्चाओं के केंद्र में रहा है। गृह मंत्री के इस बयान के बाद अब बिहार की राजनीति में पक्ष-विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज होने की पूरी संभावना है।


