बौंसी में शर्मसार हुए रिश्ते: नेत्रहीन मां को जिंदा जलाने का आरोप; पुलिस ने आरोपी बेटे को लिया हिरासत में, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

बौंसी/बांका | 27 फरवरी, 2026: बांका जिले के बौंसी थाना क्षेत्र के पोरांय गांव से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक कलयुगी बेटे पर अपनी ही नेत्रहीन मां को जिंदा जलाकर मार डालने का गंभीर आरोप लगा है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पुत्र को हिरासत में ले लिया है और मामले की सघन पूछताछ जारी है।

90% झुलसी मां ने मायागंज में तोड़ा दम

​जानकारी के अनुसार, पोरांय गांव निवासी प्रमोद मंडल की 50 वर्षीय पत्नी उर्मिला देवी, जो नेत्रहीन थीं, बुधवार को संदिग्ध परिस्थितियों में बुरी तरह झुलस गई थीं। परिजन और ग्रामीण उन्हें आनन-फानन में बौंसी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें 90 प्रतिशत तक झुलसा हुआ पाया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए भागलपुर के मायागंज अस्पताल रेफर कर दिया गया, लेकिन इलाज के दौरान बुधवार रात उन्होंने दम तोड़ दिया। गुरुवार शाम भागलपुर के बरारी घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

ग्रामीणों का आरोप: “नशे में बेटे ने ही लगाई आग”

​घटना के बाद से पोरांय गांव के ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। पूर्व वार्ड सदस्य प्रकाश पासवान सहित फूल कुमारी देवी और कला देवी जैसे ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि बड़ा बेटा गोपी मंडल अक्सर अपनी मां के साथ मारपीट और गाली-गलौज करता था। ग्रामीणों के अनुसार, बुधवार को नशे की हालत में विवाद के दौरान गोपी ने अपनी नेत्रहीन मां पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी।

पति का बयान:

“जब यह घटना हुई, मैं बाजार गया था। घर में बड़ा बेटा गोपी और उसकी पत्नी मौजूद थे। मुझे पता चला है कि घटना से ठीक पहले मां-बेटे के बीच तीखी कहासुनी हुई थी।” — प्रमोद मंडल (मृतका के पति)

 

पुलिस की कार्रवाई और जांच के बिंदु

​बौंसी थानाध्यक्ष पंकज कुमार झा ने बताया कि पुलिस ने मुख्य आरोपी गोपी मंडल को हिरासत में ले लिया है। पुलिस निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच कर रही है:

  • पारिवारिक विवाद: मृतका के अन्य दो बेटे (सोनू और आशीष) गुजरात में मजदूरी करते हैं, घर पर केवल गोपी रहता था।
  • बयानों का मिलान: मृतका के पति और ग्रामीणों के बयानों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट: मौत के कारणों और शरीर पर मौजूद अन्य चोटों की पुष्टि के लिए मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार है।

VOB का नजरिया: क्या नशे और क्रोध में खत्म हो रही है संवेदना?

एक नेत्रहीन मां, जो पूरी तरह अपने परिवार पर आश्रित थी, उसकी इस तरह दर्दनाक मौत पूरे समाज के लिए एक बड़ा सवाल है। यदि ग्रामीणों के आरोप सही हैं, तो यह न केवल हत्या है बल्कि मानवीय संवेदनाओं की पूर्ण समाप्ति है। पुलिस को चाहिए कि वह इस मामले में स्पीडी ट्रायल चलाकर आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाए।

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