​’भारत पेट्रोलियम’ के टैंकर से निकली शराब की ‘धार’: भागलपुर में 3700 लीटर से ज्यादा विदेशी शराब जब्त; मुजफ्फरपुर के दो शातिर तस्कर गिरफ्तार

भागलपुर | 26 फरवरी, 2026: बिहार में शराब माफियाओं के ‘क्रिएटिव’ दिमाग का एक और नमूना भागलपुर में देखने को मिला है। बरारी थाना क्षेत्र के विक्रमशिला टीओपी के पास पुलिस ने एक ऐसे टैंकर को पकड़ा है, जिस पर लिखा तो ‘भारत पेट्रोलियम’ था, लेकिन अंदर तेल की जगह विदेशी शराब का ‘जखीरा’ भरा हुआ था। सिटी एसपी के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने शराब तस्करों के बड़े नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है।

गुप्त सूचना पर बिछाया गया जाल

​सिटी एसपी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली थी कि भागलपुर शहर की ओर से एक टैंकर अवैध शराब लोड कर विक्रमशिला सेतु के रास्ते नवगछिया की तरफ जा रहा है।

  • एक्शन मोड: सूचना मिलते ही विक्रमशिला टीओपी के पास सघन वाहन चेकिंग अभियान शुरू किया गया।
  • सफेद टैंकर का सच: चेकिंग के दौरान एक सफेद रंग के भारत पेट्रोलियम (Bharat Petroleum) लिखे टैंकर को रोका गया। शुरुआत में यह सामान्य तेल टैंकर जैसा दिखा, लेकिन जब गहराई से तलाशी ली गई, तो पुलिस की आंखें फटी रह गईं।

बरामदगी का ब्योरा: आंकड़ों में ‘बड़ा खेल’

मद

विवरण

कुल बरामद शराब

3773.625 लीटर

शराब का प्रकार

विदेशी शराब (विभिन्न ब्रांड्स)

वाहन का प्रकार

तेल टैंकर (भारत पेट्रोलियम का फर्जी इस्तेमाल)

पकड़े गए आरोपी

02 (मुजफ्फरपुर निवासी)

तस्करों का प्रोफाइल: पुराने खिलाड़ी हैं गिरफ्तार आरोपी

​पुलिस ने टैंकर के साथ जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया है, वे कोई नौसिखिए नहीं हैं:

  1. पहचान: दोनों आरोपी मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले हैं।
  2. क्रिमिनल रिकॉर्ड: पुलिस जांच में पता चला है कि ये दोनों पहले भी शराब तस्करी के मामले में जेल की हवा खा चुके हैं। जेल से छूटने के बाद इन्होंने फिर से वही काला कारोबार शुरू कर दिया था।

VOB का नजरिया: खाकी को ‘गच्चा’ देने की नाकाम कोशिश

​शराबबंदी वाले बिहार में तस्करों ने एंबुलेंस, डाक पार्सल और अब तेल टैंकरों को अपना ‘कवच’ बनाना शुरू कर दिया है। 3773 लीटर से ज्यादा की खेप यह बताती है कि यह किसी बड़े सिंडिकेट का काम है। मुजफ्फरपुर के तस्करों का भागलपुर रूट का इस्तेमाल करना यह भी दर्शाता है कि वे पुलिस की नजरों से बचने के लिए लगातार अपने रास्ते बदल रहे हैं। भागलपुर पुलिस की यह मुस्तैदी काबिले तारीफ है, क्योंकि अगर यह खेप निकल जाती, तो होली के आसपास अवैध बाजार में इसकी बड़ी खपत होती।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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