IIIT भागलपुर में ‘बजाज’ की रफ्तार: रोबोटिक्स और ऑटोमेशन के लिए BEST सेंटर का आगाज़; अब ‘इंडस्ट्री-रेडी’ बनेंगे बिहार के इंजीनियर

भागलपुर | 26 फरवरी, 2026: बिहार के तकनीकी शिक्षा जगत के लिए आज का दिन एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है। IIIT भागलपुर और बजाज ऑटो फाउंडेशन (BAF) ने हाथ मिलाते हुए एक महत्वपूर्ण समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत कैंपस में ‘बजाज इंजीनियरिंग स्किलिंग ट्रेनिंग’ (BEST) इनिशिएटिव की शुरुआत की जाएगी, जो छात्रों को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर सीधे इंडस्ट्री की अत्याधुनिक मशीनों और तकनीक से रूबरू कराएगा।

MoU की मुख्य बातें: एक नज़र में

 

क्यों खास है यह ‘BEST’ इनिशिएटिव?

​अक्सर इंजीनियरिंग की डिग्री और इंडस्ट्री की डिमांड के बीच एक बड़ी खाई होती है। ‘BEST’ प्रोग्राम इसी अंतर को भरने का काम करेगा:

  • वर्ल्ड-क्लास लैब: बजाज ऑटो फाउंडेशन कैंपस में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन के लिए बेहतरीन उपकरणों से लैस प्रयोगशालाएं तैयार करेगा।
  • एक्सपर्ट करिकुलम: इस प्रोग्राम का पाठ्यक्रम बजाज ऑटो के सीनियर लीडर्स और एक्सपर्ट इंजीनियरों ने खुद डिजाइन किया है, जो भविष्य की वर्कफोर्स की जरूरतों को ध्यान में रखता है।
  • प्रैक्टिकल अनुभव: क्लासरूम की थ्योरी के साथ-साथ छात्रों को रीयल-वर्ल्ड प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका मिलेगा, जिससे उनकी ‘एम्प्लॉयबिलिटी’ (नौकरी पाने की क्षमता) कई गुना बढ़ जाएगी।

दिग्गजों के बोल: “भविष्य के लिए तैयार है भागलपुर”

“बजाज ऑटो के साथ यह सहयोग IIIT भागलपुर में इंडस्ट्री-एकेडेमिया पार्टनरशिप को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल है। इससे हमारे स्टूडेंट्स को मॉडर्न टेक्नोलॉजी और हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल लर्निंग का कीमती अनुभव मिलेगा।”

प्रो. मधुसूदन सिंह, डायरेक्टर, IIIT भागलपुर

 

“हमारा मकसद हैंड्स-ऑन, एप्लीकेशन-ओरिएंटेड ट्रेनिंग देकर एकेडमिक लर्निंग और इंडस्ट्री की ज़रूरतों के बीच के अंतर को कम करना है। यह सेंटर टैलेंट को निखारने और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए एक प्लेटफॉर्म बनेगा।”

सुधाकर गुडीपति, VP-CSR, बजाज ऑटो लिमिटेड

 

VOB का नजरिया: बिहार के युवाओं के लिए ‘हाई-स्पीड’ टेक-ऑफ

​जब IIIT भागलपुर जैसा प्रतिष्ठित संस्थान और बजाज जैसा ग्लोबल ब्रांड साथ आते हैं, तो फायदा सीधे तौर पर बिहार के मेधावी छात्रों को होता है। अब भागलपुर के इंजीनियरों को रोबोटिक्स की बारीकियां सीखने के लिए बेंगलुरु या पुणे भागने की जरूरत नहीं होगी। यह कदम न केवल प्लेसमेंट के आंकड़ों को सुधारेगा, बल्कि बिहार को देश के ‘टेक्नोलॉजिकल मैप’ पर और भी मजबूती से स्थापित करेगा। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस पहल का स्वागत करता है—इंजीनियर साहब, अब गियर बदलने का वक्त आ गया है!

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

 

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