कैमूर में ‘बेल’ का जश्न बना ‘जंग का मैदान’: नर्तकी के डांस और शराब पार्टी में पहुंची पुलिस पर फायरिंग; जवाबी कार्रवाई में चली गोलियां, 6 घंटे से सड़क जाम

कैमूर/कुदरा | 26 फरवरी, 2026: बिहार के कैमूर जिले में ‘बेल’ (जमानत) की खुशी में आयोजित एक पार्टी ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है। कुदरा थाना क्षेत्र के कझार घाट टोला में बुधवार और गुरुवार की मध्य रात्रि पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। 6 घंटे से अधिक समय से कुदरा-भभुआ मुख्य पथ पर यातायात पूरी तरह ठप है।

विवाद की जड़: जेल से छूटने की खुशी और नर्तकी का डांस

​घटना की शुरुआत तब हुई जब कुदरा पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली:

  • जश्न: 15 दिन पहले गिरफ्तार हुआ एक व्यक्ति बेल पर बाहर आया था। इसकी खुशी में नर्तकियों का डांस और शराब पार्टी चल रही थी।
  • छापेमारी: सूचना के सत्यापन के लिए जब थानाध्यक्ष दल-बल के साथ कझार घाट टोला पहुंचे, तो ग्रामीणों ने उनका विरोध शुरू कर दिया।

खूनी संघर्ष: पत्थर, गोलियां और घायल

​पुलिस के पहुंचते ही मामला बेकाबू हो गया और दोनों ओर से संघर्ष शुरू हो गया:

  1. ग्रामीणों का हमला: पुलिस टीम पर ईंट-पत्थर फेंके गए और फायरिंग की गई।
  2. पुलिस की जवाबी कार्रवाई: बचाव में पुलिस ने भी फायरिंग की।
  3. हताहत: इस गोलीबारी में एक व्यक्ति को गोली लगी है, जिसका इलाज जारी है। वहीं, कई पुलिसकर्मी भी पत्थरबाजी में घायल हुए हैं।

आरोप-प्रत्यारोप: “पुलिस ने घरों में घुसकर पीटा”

​गुरुवार सुबह 6:00 बजे से ही सैकड़ों ग्रामीणों ने कुदरा-भभुआ मार्ग को बांस-बल्ली लगाकर जाम कर दिया है।

  • महिलाओं का आरोप: स्थानीय महिलाओं का आरोप है कि पुलिस ने घरों में घुसकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के साथ लाठी-डंडे से मारपीट की है और वाहनों में तोड़फोड़ की है।
  • प्रशासनिक रुख: मोहनिया एसडीएम रत्ना प्रियदर्शनी और डीएसपी प्रदीप कुमार मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि सड़क जाम कोई विकल्प नहीं है और विधि सम्मत जांच की जाएगी।

कार्रवाई का लेखा-जोखा: 13 गिरफ्तार

विवरण

संख्या/स्थिति

नामजद आरोपी

28

अज्ञात आरोपी

50

गिरफ्तारी

13 लोग

सड़क जाम की अवधि

6+ घंटे (जारी)

VOB का नजरिया: जश्न जब कानून की सीमा लांघ दे

​जेल से बाहर आने की खुशी मनाना व्यक्तिगत विषय हो सकता है, लेकिन शराबबंदी वाले राज्य में ‘शराब पार्टी’ और पुलिस पर ‘फायरिंग’ करना सीधे तौर पर कानून को चुनौती देना है। वहीं, अगर पुलिस ने वास्तव में निर्दोष महिलाओं और बच्चों पर बल प्रयोग किया है, तो यह भी जांच का गंभीर विषय है। कैमूर की यह घटना प्रशासनिक मुस्तैदी और ग्रामीण आक्रोश के बीच की गहरी खाई को दर्शाती है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

 

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