मुंगेर। शहर की सड़कों पर अचानक एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां सायरन बजाती नजर आईं। मॉल और स्कूलों के बाहर अफरा-तफरी का माहौल, घायल पड़े लोगों का दृश्य और अस्पतालों में बढ़ती हलचल देखकर आम लोग घबरा उठे। कुछ देर के लिए ऐसा लगा मानो कोई बड़ा हादसा हो गया हो।
हालांकि, बाद में स्पष्ट हुआ कि यह कोई वास्तविक दुर्घटना नहीं, बल्कि National Disaster Management Authority (NDMA) द्वारा आयोजित भूकंप परिदृश्य आधारित व्यापक मॉक ड्रिल थी। यह अभ्यास आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार के निर्देश पर कराया गया।
सुबह ठीक 8 बजे जिला प्रशासन हाई अलर्ट मोड में आ गया। भौगोलिक दृष्टि से भूकंप ज़ोन-4 में आने वाले मुंगेर को इस अभ्यास के लिए अहम केंद्र बनाया गया। पहले चरण में मॉल और स्कूल को परिदृश्य स्थल बनाया गया, जहां “मलबे में दबे” घायलों को एसडीआरएफ, सीआरपीएफ, आपदा मित्र, फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोगों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया।
दूसरे चरण में जिलाधिकारी कार्यालय के कमांडिंग सेंटर में कंट्रोल रूम सक्रिय हुआ और पूरे जिले की इमरजेंसी सेवाओं को अलर्ट जारी किया गया। तीसरे चरण में एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां सायरन बजाते हुए सड़कों पर दौड़ीं और घायलों को तत्परता से सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां पहले से तैयार डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने प्राथमिक उपचार शुरू किया।
जिलाधिकारी निखिल धनराज ने कहा कि आपदा से बचाव का सबसे बड़ा साधन जागरूकता और पूर्व तैयारी है। वहीं एसपी सैय्यद इमरान मसूद ने बताया कि ट्रैफिक प्रबंधन के लिए दस प्रमुख स्थानों पर विशेष तैनाती की गई थी, ताकि राहत एवं बचाव कार्य में कोई बाधा न आए।
पटना स्थित मुख्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूरे अभ्यास की निगरानी की गई। इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य यह परखना था कि यदि वास्तविक भूकंप की स्थिति उत्पन्न हो, तो प्रशासन और आपात सेवाएं किस तरह त्वरित और समन्वित कार्रवाई कर सकती हैं। मुंगेर ने इस अभ्यास के जरिए संदेश दिया कि तैयारी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।


