सूरत में ‘पटना’ के परिवार का दर्दनाक अंत: कर्ज और शेयर बाजार के घाटे ने छीनी तीन जिंदगी; सुसाइड नोट में लिखा- “कैंडी का ख्याल रखना”

सूरत/पटना | 26 फरवरी, 2026: रोजी-रोटी की तलाश में बिहार से बाहर गए एक और परिवार के लिए परदेस काल बन गया। गुजरात के सूरत के वेसु इलाके में रहने वाले पटना के एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत की खबर ने राजधानी पटना को झकझोर कर रख दिया है। आर्थिक तंगी और भारी कर्ज के दबाव में इस परिवार ने यह आत्मघाती कदम उठाया।

घटना का विवरण: ‘हैप्पी एलीगेंस’ बिल्डिंग में मातम

​सूरत के पॉश इलाके वेसु स्थित ‘हैप्पी एलीगेंस’ बिल्डिंग में रहने वाले बालमुकुंद खेतान के घर से बुधवार को एक साथ तीन शव मिलने से सनसनी फैल गई।

  • मृतक: घटना में परिवार के मुखिया बालमुकुंद खेतान, उनकी पत्नी प्रियंका और एक मासूम बेटी की मौत हो गई है।
  • बच्ची की हालत गंभीर: दंपती की एक और छोटी बेटी फिलहाल अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है, उसकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है।

वजह: शेयर बाजार का ‘जहर’ और कर्ज का बोझ

​जांच में यह बात सामने आई है कि यह परिवार पिछले कुछ समय से भारी आर्थिक संकट से गुजर रहा था।

  • नुकसान: बालमुकुंद पिछले दो वर्षों से घर से ही शेयर बाजार में निवेश का काम कर रहे थे, जहाँ उन्हें भारी वित्तीय घाटा हुआ था।
  • दबाव: घाटे की भरपाई के लिए उन्होंने बाजार से पैसे उधार लिए थे, जिन्हें लौटाने के लिए उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था।
  • पुलिस कार्रवाई: मृतक के ससुर की शिकायत के आधार पर पुलिस ने वैभव रुंगटा नामक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

भावुक सुसाइड नोट: “कैंडी का ख्याल रखना”

​पुलिस को घर से तीन पन्नों का एक सुसाइड नोट मिला है, जिस पर प्रियंका और बालमुकुंद दोनों के हस्ताक्षर हैं। सुसाइड नोट में लिखी बातें किसी को भी भावुक कर सकती हैं:

  • पालतू कुत्ता: मौत को गले लगाने से पहले दंपती ने अपने पालतू कुत्ते ‘कैंडी’ के प्रति अपनी चिंता जाहिर की और लिखा कि ‘कैंडी का ख्याल रखना’।
  • आखिरी इच्छा: प्रियंका ने सुसाइड नोट में यह भी जिक्र किया है कि पटना में रहने वाली उनकी सास को उनका मोबाइल फोन और उनके द्वारा खरीदे गए नए कपड़े दे दिए जाएं।

VOB का नजरिया: क्या आर्थिक दबाव का हल केवल मौत है?

​पटना के इस परिवार का अंत समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी है। शेयर बाजार की अनिश्चितता और कर्ज का बढ़ता जाल कई बार इंसान को इस हद तक तोड़ देता है कि वह मासूम बच्चों के बारे में भी नहीं सोच पाता। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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