
पटना | 26 फरवरी, 2026: बिहार विधान परिषद में बुधवार को एक दुर्लभ दृश्य देखने को मिला, जहाँ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को किनारे रखकर पक्ष और विपक्ष के सदस्य एकजुट नजर आए। मामला कांग्रेस के वरिष्ठ विधान पार्षद (MLC) डॉ. समीर कुमार सिंह की जमीन पर भू-माफियाओं के कब्जे और उन्हें दी गई जान से मारने की धमकी का था। सदन के 18 सदस्यों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर सरकार को घेरा।
“28 फरवरी के बाद देख लेंगे”: अधिकारियों के सामने दी धमकी
सदन में अपनी पीड़ा रखते हुए समीर सिंह ने मुंगेर जिले के टेटिया बब्बर अंचल स्थित देवरिया की घटना का जिक्र किया:
- दो बार मापी, फिर भी कब्जा: उन्होंने बताया कि देवरिया में उनके दो प्लॉट हैं, जिनकी उन्होंने अधिकारियों की मौजूदगी में दो बार मापी करवाई।
- खुलेआम चुनौती: समीर सिंह के अनुसार, जब अधिकारी वहां मौजूद थे, तब भू-माफियाओं ने उन्हें धमकी देते हुए कहा, “28 फरवरी के बाद देख लेंगे”।
- माफियाओं का दुस्साहस: एक माननीय सदस्य को प्रशासनिक अमले के सामने धमकी दिया जाना राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सदन में दिखी एकजुटता: 18 पार्षदों ने एक सुर में उठाई आवाज
इस ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर बीजेपी के अनिल कुमार के साथ-साथ सैयद फैसल अली, हरि सहनी, कुमुद वर्मा, महेश्वर सिंह, मो. फारूक, राजीव कुमार, अब्दुल बारी सिद्दिकी, बिनोद जायसवाल और संजय प्रकाश सहित 18 सदस्यों ने अपनी सहमति जताई। यह एकजुटता दर्शाती है कि भू-माफियाओं का बढ़ता मनोबल अब जन प्रतिनिधियों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।
सरकार का जवाब: “कानून का राज है, कठोर कार्रवाई होगी”
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने सरकार की ओर से कड़ा रुख अपनाते हुए सदन को आश्वस्त किया:
- कठोर कार्रवाई: उन्होंने कहा कि बिहार में कानून का राज है और सदस्य की लिखित शिकायत पर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- जांच टीम का गठन: मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंगेर के प्रमंडलीय आयुक्त और राजस्व विभाग के अपर सचिव को खुद जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- 15 दिन की समय-सीमा: सरकार ने इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर पेश करने का निर्देश दिया है।
- जमीन की मापी: उपमुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि विवादित जमीन की उचित मापी सुनिश्चित की जाएगी।
VOB का नजरिया: जब रसूखदार ही असुरक्षित हों…
अगर बिहार में एक विधान पार्षद की जमीन सुरक्षित नहीं है और उन्हें अधिकारियों के सामने धमकी दी जा सकती है, तो आम आदमी की स्थिति की कल्पना की जा सकती है। मुंगेर के प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा की जाने वाली यह जांच केवल एक भूखंड के विवाद की नहीं, बल्कि प्रशासनिक इकबाल की परीक्षा भी होगी। 28 फरवरी की ‘डेडलाइन’ करीब है, ऐसे में देखना होगा कि पुलिस प्रशासन समीर सिंह की सुरक्षा और उनकी संपत्ति की रक्षा के लिए क्या कदम उठाता है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


