पटना | 26 फरवरी, 2026: बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाले से जुड़े भागलपुर और बांका कोषागार मामले (कांड संख्या आरसी 63ए/96) में बुधवार को पटना की विशेष सीबीआई अदालत में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया। इस मामले में अनुसंधानकर्ता पदाधिकारी (IO) की गवाही शुरू हो गई है, जो इस लंबी कानूनी लड़ाई में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।
गवाही के मुख्य बिंदु: 116वें गवाह के तौर पर पेशी
सीबीआई की विशेष अदालत में तत्कालीन इंस्पेक्टर नागेंद्र प्रसाद ने अपनी गवाही दर्ज कराई। सीबीआई ने उन्हें इस मामले में 116वें गवाह के रूप में पेश किया है।
- सबूतों का आधार: गवाह ने अदालत को बताया कि मुख्य अनुसंधानकर्ता और अन्य सहायकों के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर ही 44 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी।
- अगली सुनवाई: नागेंद्र प्रसाद की गवाही का सिलसिला गुरुवार को भी जारी रहेगा।
क्या है पूरा मामला? ₹45 लाख की अवैध निकासी
यह पूरा मामला 90 के दशक के उस दौर का है जिसने बिहार की राजनीति को हिलाकर रख दिया था:
- फर्जी विपत्र: यह कांड भागलपुर और बांका कोषागार से जाली विपत्रों (Fake Bills) के आधार पर अवैध निकासी से संबंधित है।
- निकासी की राशि: इस मामले में कुल 45 लाख रुपये की अवैध निकासी का आरोप है।
- आरोपी: शुरुआत में सीबीआई ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्रा सहित 44 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
वर्तमान स्थिति: लालू प्रसाद सहित 18 पर चल रहा मुकदमा
समय के साथ इस मामले में कई आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है या फैसले आ चुके हैं। वर्तमान में:
- ट्रायल: राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद समेत कुल 18 आरोपितों पर अभी ट्रायल चल रहा है।
- कानूनी प्रक्रिया: सीबीआई के वकील ने अनुसंधानकर्ता की गवाही के साथ अपनी दलीलों को और मजबूत करना शुरू कर दिया है।
VOB का नजरिया: दशकों पुराने मामले और इंसाफ का इंतजार
चारा घोटाले के अलग-अलग मामलों में सजा और जमानत का सिलसिला सालों से चल रहा है। भागलपुर और बांका कोषागार से जुड़े इस विशिष्ट मामले में 116वें गवाह की गवाही दर्शाती है कि सीबीआई अपनी जांच को अंतिम मुकाम तक पहुँचाने के लिए कितनी गहराई से काम कर रही है। बिहार की जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि गुरुवार की गवाही में क्या नए तथ्य सामने आते हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


