भागलपुर | 26 फरवरी, 2026: जिले के हजारों शिक्षकों के लिए इस बार की होली खुशियों भरी होने वाली है। शिक्षा विभाग ने त्योहार से पहले शिक्षकों के वेतन और बकाया (एरियर) भुगतान की प्रक्रिया तेज कर दी है। बुधवार को जिला शिक्षा कार्यालय में डीईओ राजकुमार शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEOs) को इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
वेतन और एरियर के लिए मांगा गया डेटा
डीईओ ने बैठक में स्पष्ट किया कि होली के अवसर पर शिक्षकों को समय पर वेतन मिलना प्राथमिकता है। इसके लिए उन्होंने सभी बीईओ से संबंधित प्रखंडों के शिक्षकों की अनुपस्थिति विवरणी (Attendance Statement) तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है।
- एरियर भुगतान: लंबित एरियर के मामलों को निपटाने के लिए स्थापना शाखा को सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
- प्राथमिकता: पटना मुख्यालय स्तर से योजनाओं की निरंतर निगरानी हो रही है, इसलिए लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन करने की हिदायत दी गई है।
स्कूल मरम्मत राशि: 1 सप्ताह का अल्टीमेटम
बैठक में विद्यालयों के बुनियादी ढांचे और वित्तीय अनुशासन पर भी चर्चा हुई:
- उपयोगिता प्रमाण पत्र: स्कूलों की मरम्मत के लिए प्रति विद्यालय उपलब्ध कराई गई 50,000 रुपये की राशि की समीक्षा की गई। डीईओ ने निर्देश दिया कि सभी विद्यालय एक सप्ताह के भीतर इस राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) अनिवार्य रूप से जमा करें।
- आईसीटी लैब की निगरानी: जिले के विद्यालयों में आईसीटी लैब (बीओओ-बीओडी मॉडल) की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई ताकि तकनीकी शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रहे।
- शिक्षकों का पदस्थापन: स्कूलों में शिक्षकों की अद्यतन स्थिति और पदस्थापन की जानकारी ली गई, ताकि छात्र-शिक्षक अनुपात को संतुलित रखा जा सके।
प्रशासनिक मुस्तैदी: मुख्यालय की पैनी नजर
डीईओ राजकुमार शर्मा ने सभी बीईओ को सचेत करते हुए कहा कि विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और तेजी अनिवार्य है। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, क्योंकि मुख्यालय स्तर पर हर योजना की सीधी समीक्षा की जा रही है।
VOB का नजरिया: क्या समय पर मिलेगा पैसा?
त्योहार के समय वेतन भुगतान का निर्णय शिक्षकों के लिए बड़ी राहत है। अक्सर डेटा देरी से मिलने के कारण भुगतान लटक जाता है, लेकिन डीईओ द्वारा पहले ही अनुपस्थिति विवरणी मांगना एक सकारात्मक कदम है। अब जिम्मेदारी बीईओ स्तर पर है कि वे कितनी तत्परता से स्थापना शाखा को सूची भेजते हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


