PK का नीतीश सरकार को अल्टीमेटम: “वादे पूरे नहीं हुए तो गद्दी छोड़ने पर करेंगे मजबूर”; सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर भी जताई असहमति

समस्तीपुर | 25 फरवरी, 2026: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) अपनी ‘बिहार नवनिर्माण यात्रा’ के तहत आज समस्तीपुर पहुंचे। यहाँ मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने बिहार की सत्तासीन सरकार पर तीखा हमला बोला और चुनावी वादों को लेकर आर-पार की लड़ाई का एलान किया। पीके ने स्पष्ट कहा कि अगर सरकार ने जनता से किए गए वादे पूरे नहीं किए, तो उन्हें सत्ता से बेदखल करने के लिए जन सुराज बड़ा आंदोलन छेड़ेगा।

“झांसे देकर चुनाव जीतना आसान, वादा निभाना मुश्किल”

​प्रशांत किशोर ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए जो वादे और ‘झांसे’ जनता को दिए गए थे, उनका हिसाब लिया जाएगा।

  • आंदोलन की चेतावनी: पीके ने कहा, “अगर सरकार अपने वादे पूरे नहीं करती है, तो हम लोग चुप नहीं बैठेंगे। हम सड़क पर उतरेंगे, आंदोलन करेंगे और इस सरकार को गद्दी छोड़ने पर मजबूर कर देंगे।”
  • जनता की भागीदारी: उन्होंने समस्तीपुर के लोगों से आह्वान किया कि वे अपने हक के लिए आवाज उठाएं और केवल नारों के बहकावे में न आएं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर PK का तीखा सवाल

​प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रशांत किशोर ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई एक टिप्पणी पर खुलकर अपनी असहमति दर्ज कराई। सूत्रों के अनुसार, कोर्ट ने किसी मामले में यह कहा था कि ‘आप चुनाव हार गए हैं तो यहाँ क्यों आए हैं?’

“इस देश में जिसके साथ अन्याय होगा, वही तो कोर्ट जाएगा न? अगर कोई चुनाव जीत ही जाता, तो उसे अदालत के दरवाजे खटखटाने की जरूरत ही क्या थी? न्याय की उम्मीद वहीं की जाती है जहाँ शक्ति का संतुलन बिगड़ता है।”प्रशांत किशोर

 

​PK ने तर्क दिया कि चुनाव में हार या जीत न्याय मांगने के अधिकार को खत्म नहीं करती। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए एक गंभीर विषय बताया।

नवनिर्माण यात्रा का अगला पड़ाव

​समस्तीपुर में पीके की इस यात्रा का उद्देश्य लोगों को राजनीतिक रूप से जागरूक करना और ‘जन सुराज’ की विचारधारा से जोड़ना है। उन्होंने जिले के विभिन्न प्रखंडों का दौरा कर स्थानीय समस्याओं को समझा और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का संकल्प दोहराया।

VOB का नजरिया: क्या बिहार में ‘तीसरे विकल्प’ की जमीन तैयार है?

​प्रशांत किशोर का यह कड़ा रुख दिखाता है कि वे आगामी समय में बिहार की राजनीति को केवल चुनावी मैनेजमेंट तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि एक ‘विपक्ष’ की भूमिका में खुद को मजबूती से स्थापित कर रहे हैं। सरकार के लिए उनकी यह चेतावनी एक बड़ी चुनौती बन सकती है, खासकर तब जब वे सीधे जनता की बुनियादी समस्याओं (वादे और झांसे) को मुद्दा बना रहे हैं।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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