गया | 25 फरवरी, 2026: बिहार के गया शहर में शराबबंदी कानून की धज्जियां उड़ाने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस महकमे और नगर निगम की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोतवाली थाना पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर गया मेयर के सरकारी बॉडीगार्ड को भारी मात्रा में बीयर के साथ रंगे हाथों दबोचा है। हद तो तब हो गई जब गिरफ्तार साथी को छुड़ाने के लिए पैरवी करने आए एक निजी बॉडीगार्ड को भी पुलिस ने जेल की हवा खिला दी।
पिपरपाती में ‘पार्टी’ का प्लान फेल: कार से निकली 216 केन बीयर
कोतवाली पुलिस को सूचना मिली थी कि पिपरपाती इलाके में एक सफेद रंग की स्विफ्ट (Swift) कार में शराब की बड़ी खेप लाई जा रही है।
- घेराबंदी: डीएसपी टाउन सनोज कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने इलाके को सील किया।
- बरामदगी: जब संदिग्ध कार की तलाशी ली गई, तो पुलिस के भी होश उड़ गए। कार की डिक्की से 108 लीटर बीयर (करीब 216 केन) बरामद की गई।
- गिरफ्तारी: पुलिस ने मौके से कार सवार युवक को हिरासत में लिया, जिसकी पहचान मेयर के सरकारी बॉडीगार्ड के रूप में हुई।
दोस्ती पड़ गई भारी: पैरवी करने आए निजी गार्ड भी नपे
मामले में दिलचस्प मोड़ तब आया जब मेयर के सरकारी बॉडीगार्ड की गिरफ्तारी की खबर उसके एक दोस्त (निजी बॉडीगार्ड) को मिली। वह शान से थाने में अपने साथी की ‘पैरवी’ करने पहुँचा था। पुलिस ने जब उससे कड़ाई से पूछताछ की और मामले में उसकी संलिप्तता देखी, तो उसे भी तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया। अब दोनों ‘बॉडीगार्ड’ हवालात में एक साथ सलाखें गिन रहे हैं।
DSP का बयान: “कहाँ से आई और किसे जानी थी बीयर?”
डीएसपी टाउन सनोज कुमार ने बताया कि दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है।
”यह एक गंभीर मामला है क्योंकि इसमें एक सरकारी सुरक्षाकर्मी शामिल है। हम यह पता लगा रहे हैं कि यह खेप कहाँ से मंगवाई गई थी और शहर में किन ‘बड़े रईसों’ को इसकी सप्लाई दी जानी थी। तस्करी में इस्तेमाल की गई कार को भी जब्त कर लिया गया है।”
VOB का नजरिया: जब रक्षक ही बन जाए ‘सप्लायर’
बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर सरकार और पुलिस भले ही सख्त होने का दावा करे, लेकिन जब माननीय (मेयर) की सुरक्षा में तैनात जवान ही ‘होम डिलीवरी’ के धंधे में उतर जाए, तो कानून का डर किसे रहेगा?
- अनुशासन पर सवाल: क्या सरकारी गार्ड्स की गतिविधियों पर विभाग की कोई नजर नहीं रहती?
- गाड़ी का खेल: अक्सर ‘सरकारी रसूख’ वाली गाड़ियों का इस्तेमाल पुलिस चेकिंग से बचने के लिए किया जाता है, गया की इस घटना ने इस कड़वे सच पर मुहर लगा दी है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


