भागलपुर का ‘फाइलेरिया वार’: 14 दिनों में 24 लाख लोगों ने खाई दवा; अब स्कूलों में लगेंगे बूथ, जानें क्यों चक्कर आना है ‘शुभ संकेत’!

भागलपुर | 25 फरवरी, 2026: भागलपुर जिले को ‘हाथीपांव’ (फाइलेरिया) मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 10 फरवरी से शुरू हुए सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम (MDA) के शुरुआती 14 दिनों में ही जिले ने अपने लक्ष्य का 75% हिस्सा पूरा कर लिया है। अब तक 24 लाख से ज्यादा लोग फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कर चुके हैं। अब अभियान अपने अंतिम और निर्णायक दौर (25-27 फरवरी) में प्रवेश कर गया है, जहाँ जोर ‘बूथ आधारित’ कवरेज पर होगा।

14 दिनों का रिपोर्ट कार्ड: जेल से लेकर मेगा कैंप तक ‘एक्शन’

​जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ ने बताया कि जिले की रणनीति इस बार काफी आक्रामक रही है:

  • बड़ा आंकड़ा: कुल 32,25,216 लोगों के लक्ष्य के मुकाबले 24,16,527 लाभार्थियों को दवा खिलाई जा चुकी है।
  • जेल में ‘पाताल लोक’ तक पहुँच: 17-18 फरवरी को विशेष कैंप लगाकर 3400 कैदियों और जेल कर्मियों को सुरक्षित दवा दी गई।
  • मेगा कैंप का जादू: 11 फरवरी को आयोजित मेगा कैंप में एक ही दिन में करीब 4 लाख लोगों ने स्वास्थ्य कर्मियों के सामने दवा खाई।

अंतिम 3 दिन का मास्टरप्लान: अब स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर ‘बूथ’

​आज (25 फरवरी) से 27 फरवरी तक अभियान का स्वरूप बदल गया है। अब आशा कार्यकर्ता घर-घर जाने के बजाय निर्धारित केंद्रों पर मौजूद रहेंगी:

  1. स्कूल और कॉलेज: बच्चों और शिक्षकों को कवर करने के लिए शिक्षण संस्थानों में बूथ लगाए जा रहे हैं।
  2. सार्वजनिक स्थान: चौक-चौराहों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी दवा उपलब्ध होगी।
  3. लक्ष्य: बचे हुए 25% लोगों को इन तीन दिनों में कवर कर भागलपुर को 100% सुरक्षित बनाना है।

डरें नहीं! अगर दवा खाकर चक्कर आए, तो समझिए ‘दवा काम कर रही है’

​अक्सर लोग साइड इफेक्ट्स के डर से दवा नहीं खाते, लेकिन एक्सपर्ट्स की राय अलग है:

​”अगर फाइलेरिया की दवा खाने के बाद आपको मितली या हल्का चक्कर आता है, तो यह शुभ संकेत है। इसका मतलब है कि आपके शरीर में फाइलेरिया के सूक्ष्म परजीवी मौजूद थे, जो अब मर रहे हैं। इससे घबराने की जरूरत नहीं है।”

डॉ. दीनानाथ, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी

 

​स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि हर ब्लॉक में रैपिड रेस्पोंस टीम (RRT) तैनात है, जो किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। यह दवा शुगर और बीपी के मरीजों के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है।

सावधान! ये लोग बिल्कुल न खाएं दवा

​वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी (VDCO) आरती कुमारी ने कुछ सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। निम्नलिखित लोग यह दवा न खाएं:

  • ​2 साल से कम उम्र के बच्चे।
  • ​गर्भवती महिलाएं।
  • ​ऐसी महिलाएं जो पिछले एक सप्ताह के भीतर मां बनी हैं।
  • ​गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति।

VOB का नजरिया: 5 साल की मेहनत, जीवनभर की फुर्सत

​फाइलेरिया केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि सामाजिक अभिशाप है जो हाइड्रोसील और हाथीपांव जैसी विकृतियां पैदा करता है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति लगातार 5 साल तक साल में एक बार यह दवा खा ले, तो उसे जीवनभर फाइलेरिया होने का खतरा खत्म हो जाता है। भागलपुर के लोगों ने जिस तरह 75% भागीदारी दिखाई है, वह काबिले तारीफ है। अब बस आखिरी धक्का बाकी है!

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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