कहलगांव में चूल्हे की चिंगारी ने 8 परिवारों को किया सड़क पर, मछली पकड़ने के जाल से लेकर शादी का सामान तक सब राख

भागलपुर/कहलगांव | 25 फरवरी, 2026: भागलपुर जिले के कहलगांव में रसलपुर थाना क्षेत्र के कुलकूलिया (सिंचाई विभाग, वार्ड संख्या 13) में मंगलवार को आग ने ऐसा कहर ढाया कि आठ हंसते-खेलते परिवार पल भर में बेघर हो गए। दोपहर के वक्त रसोई के चूल्हे से उठी एक छोटी सी चिंगारी ने पछुआ हवा के झोंकों के साथ मिलकर देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और पूरे मोहल्ले में मातम फैला दिया।

कैसे शुरू हुआ ‘मौत का नाच’?

​स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, आग की शुरुआत राजा सहनी के घर से हुई। घर में खाना बनाया जा रहा था, तभी चूल्हे से निकली एक चिंगारी छप्पर में जा लगी। जब तक घरवाले कुछ समझ पाते, आग ने आसपास के घरों को अपनी चपेट में ले लिया। भीषण गर्मी और तेज हवाओं ने आग को बुझाने के हर मानवीय प्रयास को विफल कर दिया।

इन 8 परिवारों का सबकुछ छीन लिया आग ने:

​आग की लपटों ने किसी को संभलने का मौका नहीं दिया। इस हादसे में निम्नलिखित लोगों के घर पूरी तरह जलकर खाक हो गए:

  • ​राजा सहनी
  • ​अमरजीत सहनी
  • ​सूरज सहनी
  • ​चंदन सहनी
  • ​पंकज सहनी
  • ​मनोज सहनी
  • ​मुन्ना सहनी
  • ​राजू सहनी

मछली पकड़ने के जाल से लेकर ₹2 लाख कैश तक… सब स्वाहा

​यह अग्निकांड इन परिवारों के लिए केवल संपत्ति का नुकसान नहीं, बल्कि उनकी आजीविका पर भी करारी चोट है। पीड़ित परिवारों ने बताया कि आग में:

  1. आजीविका का साधन: नदी में मछली पकड़ने के लिए रखे गए महंगे जाल जल गए।
  2. शादी की खुशियां: घर में होने वाली शादी के लिए जमा किए गए नए कपड़े, बर्तन और गहने राख हो गए।
  3. नगदी और जेवर: करीब दो लाख रुपये नगद और सोने-चांदी के जेवरात मलबे में तब्दील हो गए।
  4. घरेलू उपकरण: टीवी, फ्रिज और अनाज का एक-एक दाना जल चुका है।

अग्निशमन विभाग की देरी और ग्रामीणों का संघर्ष

​हादसे के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल था। ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बाल्टियों और पंपसेट से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि कोई करीब जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। सूचना मिलने के काफी देर बाद बिहार अग्निशमन विभाग की दो दमकल गाड़ियां मौके पर पहुँचीं। हालांकि, तब तक अधिकांश सामान जल चुका था, लेकिन दमकल कर्मियों और ग्रामीणों के साझा प्रयास से आग को वार्ड के बाकी घरों में फैलने से रोक लिया गया।

VOB का नजरिया: चूल्हा जलाते वक्त सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

​कहलगांव की यह घटना एक बार फिर चेतावनी है कि गर्मी के मौसम में सावधानी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

  • दूरी का सवाल: अग्निशमन केंद्र से गांवों की दूरी अक्सर बड़ी तबाही की वजह बनती है।
  • मुआवजा: अब गेंद प्रशासन के पाले में है। अंचल अधिकारी (CO) को जल्द से जल्द क्षति का आकलन कर इन गरीब परिवारों को सरकारी सहायता प्रदान करनी चाहिए, ताकि ये फिर से अपना सिर ढकने की जगह बना सकें।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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