सावधान भागलपुर! ‘आग’ से निपटने को फायर ब्रिगेड तैयार, पर ‘झूठ’ ने बढ़ाई टेंशन; 13 गाड़ियां अलर्ट मोड पर

भागलपुर | 25 फरवरी, 2026: सूरज के तेवर तल्ख होते ही भागलपुर में ‘अगलगी’ का खतरा मंडराने लगा है। गर्मी की आहट के साथ ही अग्निशमन विभाग (Fire Department) ने अपनी कमर कस ली है। शहर से लेकर गांव तक, आग की लपटों पर लगाम लगाने के लिए विभाग 24 घंटे ‘ऑन टोज’ है। लेकिन, आग की चुनौतियों के बीच एक और ‘मुसीबत’ खड़ी हो गई है— फॉल्स कॉल (False Calls)। कुछ शरारती तत्वों की झूठी सूचनाओं ने फायर फाइटर्स की नींद उड़ा दी है।

फायर ब्रिगेड का ‘पावर प्लांट’: 13 गाड़ियां और 24 घंटे पहरा

​भागलपुर अग्निशमन विभाग ने किसी भी बड़ी अनहोनी से निपटने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। विभाग की तैयारी का खाका कुछ इस प्रकार है:

  • दमकल की फौज: विभाग के बेड़े में फिलहाल 4 बड़ी दमकल गाड़ियां और 9 छोटी गाड़ियां (मिस्टी) शामिल हैं। छोटी गाड़ियां संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए ‘ब्रह्मास्त्र’ साबित होती हैं।
  • कंट्रोल रूम: 24/7 एक्टिव कंट्रोल रूम में कर्मियों की शिफ्ट वार तैनाती की गई है।
  • क्विक रिस्पांस: सूचना मिलते ही ‘मिनटों’ के भीतर गाड़ियों को रवाना करने का प्रोटोकॉल तैयार किया गया है।

फॉल्स कॉल: मज़ाक किसी की ‘मौत’ का सबब न बन जाए!

​विभाग के अधिकारियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द वे लोग हैं जो मनोरंजन के लिए दमकल को फोन घुमा देते हैं।

​”जब दमकल की गाड़ी सायरन बजाते हुए निकलती है, तो सड़क पर मौजूद हर इंसान उसे रास्ता देता है कि शायद कहीं किसी का घर या जान बचानी हो। लेकिन जब मौके पर पहुँचकर पता चलता है कि आग लगी ही नहीं है, तो वह केवल संसाधनों की बर्बादी नहीं, बल्कि उस ‘इंसानियत’ का अपमान है जो दमकल को रास्ता दे रही थी।”

विभागीय पदाधिकारी, भागलपुर

 

झूठी कॉल के ‘साइड इफेक्ट्स’:

  1. समय की बर्बादी: असली आग की घटना तक पहुँचने में देरी हो सकती है।
  2. संसाधनों का नुकसान: सरकारी ईंधन और मैनपावर की फिजूलखर्ची।
  3. मानसिक दबाव: बार-बार झूठी सूचनाओं से इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम का मनोबल गिरता है।

VOB की अपील: जागरूक बनें, जिम्मेदार बनें

​अग्निशमन विभाग ने आम जनता से पुरजोर अपील की है कि 101 या आपातकालीन नंबरों का इस्तेमाल केवल वास्तविक संकट में ही करें। आग लगने पर घबराएं नहीं, सटीक लोकेशन बताएं और दमकल के आने तक रास्ता साफ रखें।

VOB का नजरिया: शायद कुछ लोगों को लगता है कि दमकल की सायरन बजाती गाड़ियां कोई ‘मनोरंजन’ हैं, लेकिन हकीकत में यह किसी की जिंदगी बचाने की आखिरी उम्मीद होती है। याद रखें, आपका एक ‘मजाक’ किसी और के लिए ‘मातम’ की वजह बन सकता है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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