भभुआ (कैमूर) | 25 फरवरी, 2026: बिहार से राजस्थान तक फैले मानव तस्करी के एक घिनौने नेटवर्क का कैमूर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। कैमूर जिले के चैनपुर की एक नाबालिग लड़की को नौकरी का झांसा देकर राजस्थान ले जाया गया और वहां उसे ₹2 लाख में एक शख्स को बेच दिया गया। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद राजस्थान के चुरू जिले से आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है और पीड़ित बच्ची को सुरक्षित बरामद कर बिहार ले आई है।
नौकरी का झांसा और ‘दुल्हन’ की मंडी: 27 दिसंबर को बुना गया जाल
इस सनसनीखेज मामले का खुलासा मंगलवार को कैमूर एसडीपीओ मनोरंजन भारती ने एक प्रेसवार्ता के दौरान किया। घटना की शुरुआत 27 दिसंबर, 2025 को हुई थी।
- साजिशकर्ता: राजस्थान के सीकर का रहने वाला महेश कुमार चैनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव पहुँचा।
- झांसा: उसने नाबालिग लड़की के परिजनों को भरोसा दिलाया कि वह उसे राजस्थान में अच्छी नौकरी दिलवा देगा।
- धोखा: महेश लड़की को अपने साथ ले गया, लेकिन वहां उसने नौकरी दिलाने के बजाय उसे चुरू के सुभाष भामू के हाथों ₹2 लाख में बेच दिया। सुभाष ने उस नाबालिग से जबरन शादी रचा ली और उसे कैद करके रखा।
कैमूर पुलिस का ‘ऑपरेशन राजस्थान’: एसपी के पास पहुँचे थे परिजन
पिछले सप्ताह पीड़ित परिवार के लोग कैमूर एसपी हरिमोहन शुक्ला के पास पहुँचे और अपनी व्यथा सुनाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया।
- छापेमारी: पुलिस की टीम तकनीकी सुरागों का पीछा करते हुए राजस्थान के चुरू जिले के शालासार थाना क्षेत्र स्थित खरियाबाद पहुँची।
- गिरफ्तारी: पुलिस ने वहां से मुख्य आरोपित सुभाष भामू को गिरफ्तार किया।
- बरामदगी: पुलिस ने आरोपित के चंगुल से नाबालिग लड़की को छुड़ाया और उसे वापस कैमूर ले आई।
Trafficking Nexus: गरीबी का फायदा उठा रहे तस्कर
एसडीपीओ मनोरंजन भारती ने बताया कि आरोपित महेश कुमार ने बच्ची का सौदा महज पैसों के लिए किया था। पुलिस अब महेश कुमार की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। इस मामले में पुलिस मानव तस्करी (Human Trafficking) के बड़े एंगल से भी जांच कर रही है, ताकि यह पता चल सके कि इस गिरोह ने बिहार की और कितनी बेटियों को राजस्थान या अन्य राज्यों में बेचा है।
VOB का नजरिया: कब तक बिकती रहेंगी बेटियां?
कैमूर की यह घटना समाज के माथे पर कलंक है। बिहार की मासूम बेटियों को ‘नौकरी’ के नाम पर दूसरे राज्यों में ले जाकर ‘सौदा’ करने का यह खेल पुराना है। कैमूर पुलिस की सक्रियता से एक बेटी तो बच गई, लेकिन ऐसे न जाने कितने गिरोह आज भी सक्रिय हैं। जरूरत है कि ग्रामीण इलाकों में लोगों को जागरूक किया जाए ताकि वे बाहरी ‘बिचौलियों’ के झांसे में न आएं।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


