पटना/नई दिल्ली | 25 फरवरी, 2026: जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की कूटनीति का चेहरा बनेंगे। 18वीं लोकसभा के तहत गठित विभिन्न देशों के ‘पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप’ में श्री झा को भारत-जर्मनी संसदीय मैत्री संघ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह न केवल जदयू बल्कि बिहार के लिए भी गौरव की बात है कि राज्य के एक कद्दावर नेता को दो शक्तिशाली लोकतंत्रों के बीच संबंधों को मजबूत करने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
64 देशों के साथ दोस्ती का ‘ब्लूप्रिंट’: संजय झा को मिली कमान
मंगलवार को लोकसभा के निदेशक एल.वी. रमणा ने इस नियुक्ति की आधिकारिक जानकारी दी। 18वीं लोकसभा के कार्यकाल के लिए अलग-अलग देशों के साथ कुल 64 फ्रेंडशिप ग्रुप बनाए गए हैं। संजय झा के नेतृत्व में यह समूह जर्मनी के साथ व्यापारिक, सांस्कृतिक और संसदीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का कार्य करेगा।
संजय झा की ‘ड्रीम टीम’: टीम में पीटी उषा और जयराम रमेश जैसे दिग्गज
संजय झा जिस टीम का नेतृत्व करेंगे, वह अपने आप में बेहद प्रभावशाली है। इस 11 सदस्यीय टीम में खेल से लेकर राजनीति के धुरंधर शामिल किए गए हैं:
- खेल जगत से: ‘पायली एक्सप्रेस’ पीटी उषा।
- विपक्ष से: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और अनंत भदौरिया।
- बीजेपी से: सीपी जोशी और मदन राठौड़।
- अन्य सदस्य: सतीश कुमार गौतम, राजीव भट्टाचार्जी, अनिल यशवंत देसाई, डॉ. बाईरेड्डी शबरी, डॉ. एम.के. विष्णु प्रसाद।
यह टीम विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं का संगम है, जो अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारतीय संसद की एकजुटता को प्रदर्शित करेगी।
पीएम मोदी और ओम बिरला का जताया आभार
इस बड़ी नियुक्ति के बाद संजय कुमार झा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे भारत और जर्मनी के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाने के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम करेंगे।
VOB का नजरिया: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहा जदयू का कद
संजय झा को इस पद पर नियुक्त करना दिल्ली के गलियारों में जदयू के बढ़ते रसूख का संकेत है। प्रधानमंत्री मोदी का संजय झा पर यह भरोसा दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और समन्वय के मामलों में उनकी विशेषज्ञता को काफी अहमियत दी जा रही है। बिहार के किसी नेता का ऐसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समूहों का नेतृत्व करना राज्य की छवि के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


