कटिहार | 25 फरवरी, 2026: बिहार में शराबबंदी कानून को लागू हुए एक दशक बीत चुका है, लेकिन शराब तस्करों के दिमाग की ‘बत्ती’ बुझने का नाम नहीं ले रही। पुलिस अगर डाल-डाल चल रही है, तो तस्कर अब सीधे ‘पाताल’ यानी पटरियों के नीचे रास्ता खोजने लगे हैं। ताजा मामला कटिहार का है, जहाँ हाटे बाजार एक्सप्रेस को शराब तस्करी का ऐसा चलता-फिरता ‘अंडरग्राउंड’ गोदाम बनाया गया कि देखकर रेल अधिकारियों की आँखें फटी की फटी रह गईं।
ट्रेन के ‘पेट’ में तहखाना: पटरियों के शोर में छिपी थी ‘मधु’
गुप्त सूचना के आधार पर जब उत्पाद विभाग और पुलिस की टीम ने दबिश दी, तो ऊपर से सब कुछ सामान्य नजर आ रहा था। लेकिन जब बारीकी से तलाशी ली गई, तो पता चला कि तस्करों ने ट्रेन की बोगी के नीचे बने बेहद संकरे चैंबर (Under-bogie chamber) में 83 लीटर विदेशी शराब की खेप बड़ी चालाकी से छिपा रखी थी। तस्करों की प्लानिंग ये थी कि पहियों के शोर और पटरियों की धूल के बीच उनकी ये ‘पाताल वाली प्लानिंग’ किसी की नजर में नहीं आएगी, लेकिन विभाग की मुस्तैदी ने सारा खेल बिगाड़ दिया।
असली हीरो: होमगार्ड के जवान ने मौत के नीचे रेंगकर निकाली शराब
इस पूरी कार्रवाई का ‘सुपरहीरो’ बना वो होमगार्ड का जवान, जिसके जज्बे की चर्चा अब पूरे सूबे में हो रही है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें यह जवान अपनी जान की परवाह किए बिना चलती-फिरती मौत यानी ट्रेन के नीचे संकरे और खतरनाक हिस्सों में रेंगते हुए घुस गया।
जमीन से महज कुछ इंच की दूरी और ऊपर लोहे का भारी-भरकम ढांचा—जवान ने एक-एक कर शराब की बोतलें बाहर निकालीं। इस साहस को देखकर मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि अगर जरा सी भी चूक होती, तो बड़ा हादसा हो सकता था। इस जांबाज सिपाही के साहस को अब विभाग पुरस्कृत करने की तैयारी में है।
शराबबंदी पर उठते सवाल: सियासत का नया मोड़
एक तरफ प्रशासन की ऐसी सख्ती है, तो दूसरी तरफ तस्करी के बदलते और खतरनाक हथकंडे। दिलचस्प बात यह है कि अब NDA के घटक दल ही विधानसभा में शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग उठाने लगे हैं। 10 साल बाद भी अगर तस्करी के लिए ऐसे जोखिम भरे और ‘अनोखे’ जुगाड़ लगाए जा रहे हैं, तो यह व्यवस्था और कानून के जमीनी असर पर एक बड़ा सवालिया निशान है।
VOB का नजरिया
कटिहार पुलिस की इस कामयाबी ने तस्करों के हौसले पस्त जरूर किए हैं, लेकिन यह घटना एक कड़वी सच्चाई भी उजागर करती है। बिहार में शराबबंदी अब तस्करों के लिए एक ‘क्रिएटिव चैलेंज’ बन गई है। जब तक तस्करों के पास ‘जुगाड़’ और जोखिम लेने की ऐसी हिम्मत रहेगी, तब तक पुलिस के लिए यह चूहे-बिल्ली का खेल एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


