बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां थाने के थानाध्यक्ष पर विशेष पॉक्सो कोर्ट-एक ने 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायाधीश धीरेंद्र मिश्र ने यह आदेश किशोरी को अगवा कर दुष्कर्म के प्रयास के मामले की जांच समय पर पूरी न करने के कारण दिया। जुर्माने की राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कोष में जमा कराई जाएगी। कोर्ट के इस आदेश से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
तीन साल बाद भी पूरी नहीं हुई जांच
जानकारी के अनुसार, 26 मई 2023 को किशोरी के पिता ने बोचहां थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि 23 मई 2023 को मो. सईद समेत सात आरोपितों ने उनकी नाबालिग पुत्री को घर से अगवा करने का प्रयास किया। मुख्य आरोपी पर दुष्कर्म के प्रयास का भी आरोप था, लेकिन बच्ची के शोर मचाने पर आरोपी फरार हो गए।
करीब तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद पुलिस जांच पूरी नहीं कर सकी। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि नाबालिगों से जुड़े गंभीर मामलों में भी पुलिस तत्परता नहीं दिखा रही है।
अन्य मामलों में भी मांगा स्पष्टीकरण
कोर्ट ने साल 2019 के एक अन्य मामले में भी थानाध्यक्ष से जवाब तलब किया है। उस मामले में 18 नवंबर 2019 को एक किशोरी ने अजय सहनी सहित 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोपितों की गिरफ्तारी और चार्जशीट दाखिल करने में देरी पर विशेष कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा। चार्जशीट 30 जुलाई 2020 को दाखिल की गई थी।
इसी तरह 6 मार्च 2024 को मीनापुर क्षेत्र में 17 वर्षीय किशोरी के अपहरण और जबरन शादी के मामले में भी आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है। इस मामले में किशोरी की मां ने अमरजीत कुमार और रामसागर राय समेत अन्य को नामजद किया था।
वरीय अधिकारियों ने बढ़ाया दबाव
कोर्ट की सख्ती के बाद मुजफ्फरपुर पुलिस के वरीय अधिकारियों ने लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन का निर्देश दिया है। सभी लंबित अनुसंधानों को जल्द पूरा करने और गंभीर मामलों में तत्परता दिखाने को कहा गया है।


