बिहार विधानसभा में बच्चों के डिजिटल स्क्रीन टाइम पर चर्चा, सरकार ने नई नीति लाने का ऐलान किया

पटना: डिजिटल दौर में बच्चों और किशोरों में मोबाइल, रील्स और ऑनलाइन गेम्स की बढ़ती लत को लेकर सोमवार को बिहार विधानसभा में गंभीर चर्चा हुई। बहस के बाद राज्य सरकार ने बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने के लिए नई और व्यापक पॉलिसी लाने का ऐलान किया।

पश्चिम चंपारण के सिकटा विधानसभा क्षेत्र से जदयू विधायक समृद्ध वर्मा ने सदन में कहा कि गांवों तक स्मार्टफोन की पहुंच बढ़ने के साथ बच्चे घंटों मोबाइल पर व्यस्त रहते हैं, जिससे पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकार से आयु वर्ग के अनुसार स्क्रीन टाइम सीमा तय करने की मांग की।

राज्य की आईटी मंत्री Shreyasi Singh ने बताया कि बच्चों में डिजिटल निर्भरता गंभीर चिंता का विषय है। बिहार सरकार बहुविभागीय दृष्टिकोण अपनाते हुए NIMHANS (National Institute of Mental Health and Neurosciences) से सलाह लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी।

डिप्टी सीएम Samrat Choudhary ने कहा कि तकनीक से दूर रहना समाधान नहीं है, बल्कि संतुलित और सुरक्षित डिजिटल उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है।

विधायक वर्मा ने बच्चों में बढ़ती स्क्रीन एडिक्शन को “अदृश्य महामारी” करार दिया। उन्होंने स्कूलों में ‘डिजिटल हाइजीन’ पाठ्यक्रम और जिला स्तर पर एडिक्शन क्लीनिक खोलने का सुझाव दिया। इसके अलावा उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने की भी सिफारिश की।

सरकार का मानना है कि नई नीति बच्चों को सुरक्षित डिजिटल भविष्य देने में मदद करेगी। अब सबकी नजर NIMHANS की रिपोर्ट और आगामी कार्ययोजना पर टिकी है।


 

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