शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन: ‘ट्रिनिटी इंस्टीट्यूट’ की डिग्री वाले शिक्षकों पर गिरेगी गाज; बीईओ को एक सप्ताह का अल्टीमेटम

भागलपुर | 24 फरवरी, 2026: फर्जी डिग्री के सहारे शिक्षक की नौकरी पाने वालों की अब खैर नहीं। भागलपुर जिला शिक्षा विभाग ने फर्जी डिग्री के आधार पर कार्यरत शिक्षकों के खिलाफ एक बड़ा और कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने विशेष रूप से नई दिल्ली स्थित ‘ट्रिनिटी इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज’ से प्राप्त डिग्रियों की जांच शुरू कर दी है, जिसे सरकार ने अमान्य घोषित कर रखा है।

एक सप्ताह के भीतर मांगी गई ‘ब्लैक लिस्ट’

​जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय ने इस संबंध में जिले के सभी विद्यालय अवर निरीक्षक (सदर पूर्व/पश्चिम) और सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को पत्र जारी कर दिया है। निर्देशों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • डेडलाइन: सभी बीईओ को एक सप्ताह के भीतर ऐसे शिक्षकों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है जो इस संस्थान की डिग्री पर बहाल हुए हैं।
  • विवरण: सूची में संबंधित शिक्षक का नाम, उनके विद्यालय का नाम और नियोजन इकाई का पूरा विवरण देना अनिवार्य होगा।
  • वेतन पर रोक: विभाग उन शिक्षकों को चिह्नित कर रहा है जो अमान्य डिग्री के आधार पर न केवल नौकरी कर रहे हैं, बल्कि नियमित वेतन भी प्राप्त कर रहे हैं。

बीईओ पर टिकी जवाबदेही: लापरवाही पड़ी तो होगी कार्रवाई

​जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) अमरेंद्र पांडेय द्वारा जारी इस निर्देश में जवाबदेही को लेकर कड़ा संदेश दिया गया है:

  1. अधिकारियों की जिम्मेदारी: यदि जांच के बाद भी कोई ऐसा शिक्षक कार्यरत पाया जाता है जिसकी डिग्री ‘ट्रिनिटी इंस्टीट्यूट’ की है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) की होगी।
  2. विभागीय कार्रवाई: निर्देशों की अनदेखी करने या गलत सूचना देने वाले पदाधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
  3. अमान्य संस्थान: पत्र में स्पष्ट किया गया है कि विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार ‘ट्रिनिटी इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज, नई दिल्ली’ एक अमान्य संस्थान है और इसकी डिग्री नियोजन के लिए मान्य नहीं है।

जिले के स्कूलों में मची खलबली

​शिक्षा विभाग के इस अचानक आए आदेश से जिले के शिक्षक गलियारों में हड़कंप की स्थिति है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह जांच केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राज्य स्तर पर अमान्य घोषित किए गए अन्य संस्थानों की डिग्रियों की भी व्यापक समीक्षा की जा रही है।

द वॉयस ऑफ बिहार की रिपोर्ट: शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता करने वाले और फर्जीवाड़े के दम पर व्यवस्था में सेंध लगाने वालों पर प्रशासन का यह ‘हंटर’ स्वागत योग्य है। अब देखना यह है कि एक सप्ताह के भीतर कितने ‘फर्जी’ चेहरे बेनकाब होते हैं।

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