मधुबनी/बासोपट्टी | 23 फरवरी, 2026: बिहार सरकार के पर्यटन विभाग मंत्री अरुण शंकर प्रसाद के काफिले से सोमवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया। बासोपट्टी थाना क्षेत्र के कर्पूरी चौक के पास मंत्री के एस्कॉर्ट वाहन ने स्कूटी सवार दो युवकों को जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा इतना भयानक था कि एक गाड़ी की टक्कर से युवक सड़क पर गिरे और काफिले की दूसरी गाड़ी उनके ऊपर से गुजर गई। इस घटना में एक युवक की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है।
मैट्रिक की परीक्षा देकर फूफा के घर आया था छात्र
हादसे का शिकार हुए युवकों की पहचान हो गई है, जिससे परिवार में कोहराम मचा हुआ है:
- आशुतोष कुमार: शिलानाथ बरही निवासी मनोज दास का पुत्र। आशुतोष हाल ही में मैट्रिक की परीक्षा देकर अपने फूफा के घर बुंदेलखंड आया था। वह अपने दोस्त के यहां से बैग लाने जा रहा था, तभी यह हादसा हुआ। उसकी स्थिति चिंताजनक है।
- धर्मेंद्र पासवान: बासोपट्टी के बुंदेलखंड गांव निवासी लक्ष्मी पासवान का पुत्र। इसकी स्थिति फिलहाल सामान्य बताई जा रही है।
मंत्री पर संवेदनहीनता का आरोप: नहीं रुका काफिला
घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। चर्चा है कि जब यह भीषण हादसा हुआ और युवक सड़क पर तड़प रहे थे, तब मंत्री अरुण शंकर प्रसाद का काफिला एक पल के लिए भी नहीं रुका। स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बासोपट्टी पहुँचाया, जहाँ से उन्हें सदर अस्पताल और फिर मधुबनी के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
पुलिस का हैरान करने वाला रुख: पीड़ितों पर ही FIR की तैयारी
इस पूरे मामले में बासोपट्टी थानाध्यक्ष विकास कुमार का बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। थानाध्यक्ष का कहना है कि एस्कॉर्ट में थाना की भी गाड़ी शामिल थी। उन्होंने कहा कि स्कूटी चलाने वाला और उस पर सवार दोनों युवक नाबालिग हैं। पुलिस अब इन घायल युवकों के विरुद्ध ही धारा 353 (सरकारी काम में बाधा डालना) के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की बात कह रही है। पुलिस के इस तर्क ने मामले को नया मोड़ दे दिया है और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों का दर्द और वर्तमान स्थिति
जख्मी आशुतोष के परिजनों ने बताया कि मंत्री के सुरक्षा वाहन ने पहले ठोकर मारी और फिर पहिया शरीर पर चढ़ा दिया गया। फिलहाल परिजन कानूनी पचड़ों के बजाय बेटे की जान बचाने में लगे हैं और उन्होंने अभी तक कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है। आशुतोष का इलाज मधुबनी के एक निजी अस्पताल में चल रहा है, जहाँ वह जीवन और मौत के बीच जूझ रहा है।
द वॉयस ऑफ बिहार की रिपोर्ट: एक तरफ जहाँ रसूखदारों के काफिले की रफ़्तार मासूमों की जान पर भारी पड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस का घायलों पर ही केस दर्ज करने का बयान मानवता को शर्मसार करने वाला है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस खबर पर लगातार नजर बनाए हुए है।


