​’हेलो फरमाइश’ की आवाज हुई खामोश: लीफ आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने पीपल के पत्तों पर उकेरी बिरजू भैया की तस्वीर; नम आंखों से दी विदाई

भागलपुर | 23 फरवरी, 2026: अंग प्रदेश की पहचान और आकाशवाणी भागलपुर की सबसे आत्मीय आवाज, डॉ. विजय कुमार मिश्रा (बिरजू भैया) अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन से न केवल भागलपुर बल्कि पूरे बिहार के रेडियो प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है। इस दुखद घड़ी में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लीफ आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने अपनी कला के माध्यम से उन्हें एक ऐसी श्रद्धांजलि दी है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है।

पीपल के पत्तों पर ‘हेलो फरमाइश’ का जादू

​बिरजू भैया के निधन की खबर मिलते ही आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने अपनी संवेदनाओं को कला में पिरोया:

  • अनोखी कलाकृति: मधुरेंद्र ने करीब 5 घंटे के कठिन परिश्रम के बाद पीपल के हरे पत्तों पर बिरजू भैया की एक अत्यंत बारीक और जीवंत तस्वीर उकेरी।
  • अंतिम संदेश: कलाकृति पर मधुरेंद्र ने उनके सबसे लोकप्रिय शो को याद करते हुए लिखा— “हेलो फरमाइश, अलविदा बिरजू भैया।”
  • बारीकी: पत्तों पर की गई यह सूक्ष्म नक्काशी बिरजू भैया के प्रति मधुरेंद्र के सम्मान और जुड़ाव को दर्शाती है।

आवाज का वो जादूगर, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता

​डॉ. विजय कुमार मिश्रा, जिन्हें लोग प्यार से ‘बिरजू भैया’ पुकारते थे, आकाशवाणी भागलपुर के अवकाश प्राप्त उद्घोषक थे।

  1. सांस्कृतिक पहचान: उनकी आवाज केवल एक प्रसारण नहीं थी, बल्कि उसमें अंगिका माटी की मिठास और स्नेह रचा-बसा था।
  2. हेलो फरमाइश: प्रत्येक शनिवार दोपहर 1:30 बजे प्रसारित होने वाला उनका कार्यक्रम ‘हेलो फरमाइश’ श्रोताओं के बीच एक जुनून की तरह लोकप्रिय था।
  3. अंगिका गौरव: उन्होंने अपनी विशिष्ट शैली से अंगिका भाषा और संस्कृति को घर-घर तक पहुँचाया।

यादों के झरोखे से: जब बिरजू भैया ने थपथपाई थी मधुरेंद्र की पीठ

​लीफ आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने पत्रकारों से बातचीत में उस पल को याद किया जब वह पहली बार इस ‘अमर आवाज’ के मालिक से मिले थे:

  • पहली मुलाकात: 27 फरवरी 2025 को भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड में आयोजित अंगिका महोत्सव के दौरान मधुरेंद्र ने पहली बार बिरजू भैया को सामने से देखा और सुना था।
  • कला की सराहना: बिरजू भैया ने मधुरेंद्र द्वारा नाथनगर के कर्णगढ़ में बनाई गई ‘दानवीर कर्ण’ की सैंड आर्ट (बालू की कलाकृति) की काफी प्रशंसा की थी।
  • मिठास: मधुरेंद्र बताते हैं, “बचपन में रेडियो पर जो आवाज सुनी थी, उसे साक्षात सुनना एक यादगार अनुभव था। उनकी आवाज में जो अपनापन था, वह सदैव हमारे कानों में गूँजता रहेगा।”

अंग प्रदेश ने खोया अपना ‘रत्न’

​बिरजू भैया का जाना अंगिका साहित्य, कला और पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। भले ही आज माइक्रोफोन के पीछे वह आवाज शांत हो गई है, लेकिन अंग प्रदेश की गलियों तक उनकी यादें और मधुर वाणी अमर रहेगी।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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